सूर्य नमस्कार सूर्य की ओर मुख करके किया जाता है। इससे सूर्य की किरणों का सीधा प्रभाव प्रणाम करने वाले पर पड़ता है। इसके फलस्वरूप अगर उसकी किसी वाहिनी में कहीं रक्त जमा हुआ हो तो वह पिघल कर स्वाभाविक गति से नाडिय़ों में प्रवाहित होने लगता है। इससे रक्तचाप भी नियंत्रित हो जाता है।

सूर्य नमस्कार करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाइए, फिर दोनों हाथों को नमस्कार की स्थिति में जोड़कर धीरे-धीरे श्वास खींचिए। श्वास को भर लीजिए। फिर दोनों हाथों को ऊपर की ओर ले जाइए।

शरीर के ऊपरी भाग को तान कर पीछे की ओर इतना ही झुकाइए कि जिससे पीछे की ओर गिरने की संभावना न हो। वक्षस्थल का तनाव आगे की ओर होना चाहिए।

इसके बाद ऊपर की ओर ताने हुए हाथों को सीधे करते हुए पीछे की ओर तने हुए शरीर के भाग को भी सीधा कर लें फिर धीरे-धीरे दोनों हाथों को समान रूप से नीचे की ओर लाते हुए अपने शरीर को खड़े-खड़े इस प्रकार दोहरा कर लें कि हाथों की उंगलियां पैरों के पंजों का स्पर्श करने लगें। अपनी नाक को दोनों जांघों के मध्य में रखें।

सूर्य नमस्कार शरीर को शांति प्रदान करता है। मानसिक उत्तेजना और मस्तिष्क का तनाव दूर करता है। शरीर के पृष्ठ भाग में रहने वाली अकड़न दूर होती है। समस्त शरीर को समान रूप से स्वस्थ रखने में सहायक सिद्ध होता है।

इसके परिणामस्वरूप सूर्य की किरणें रोगी के शरीर में प्रविष्ट होकर उसके रोगों को नष्ट करती हैं। इस क्रिया से शरीर और मन दोनों ही स्वस्थ रहते हैं।