Wednesday, 28 June 2017, 5:43 AM

उपदेश

प्रिंस के पवित्र स्पर्श से वो हो गया धन्य

Updated on 6 June, 2015, 9:29
विश्वयुद्ध के दिन थे। 'प्रिंस ऑफ वेल्स' एडवर्ड अष्टम एक दिन युद्ध में घायल लोगों को देखने इंग्लैंड के एक निजी अस्पताल में पहुंचे। जब घायलों से मिलकर वे बाहर गेट पर आए तो उन्होंने अस्पताल के अधिकारियों से कहा, आप लोग तो घायलों की संख्या 36 बता रहे हैं।... आगे पढ़े

जब चार्ल्स ने मारा नहले पर दहला

Updated on 3 June, 2015, 6:38
कथाकार चार्ल्स डिफेन्स की इंग्लैंड में ख्याति फैल गई तो एक दिन महारानी विक्टोरिया ने उन्हें अपने महल में आमंत्रित किया। जब वो वहां पहुंचे तो उन्होंने उनसे कहानी सुनाने का आग्रह किया। चार्ल्स परम स्वाभिमानी व्यक्ति थे। उन्हें महरानी के महल में पहुंचकर कहानी सुनाने में अपना अपमान महसूस हुआ।... आगे पढ़े

सेवा-कर्म पूजा के समान

Updated on 1 June, 2015, 13:36
अनासक्त होकर किए जाने वाले अच्छे कर्म कर्म-योग में आते हैं। संसारी लोग अगर अनासक्त होकर, ईश्वर पर भक्ति रखकर, उन्हें फल समर्पण करते हुए संसार के कर्म करें तो वह भी कर्मयोग है। इस युग में अनासक्त होकर कर्म करना बहुत ही कठिन है, परंतु कर्मयोग को कोई चाह... आगे पढ़े

प्रकृति के निकट लाता है गायत्री महामंत्र

Updated on 30 May, 2015, 13:13
हरिद्वार। गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ नहीं, संबंध स्थापित करना गायत्री मंत्र सिखाता है। गायत्री महामंत्र निष्काम भाव से कर्म करने की प्रेरणा देता है। गायत्री महामंत्र के सामूहिक रूप से नियमित जप करने से अपार शक्ति उत्पन्न होती है जिससे विश्व... आगे पढ़े

खोज कर तो देखिए ब्रह्मांड के अंधकार में भी है दर्शन

Updated on 29 May, 2015, 8:14
अंधेरा और उजाला, रात और दिन यूं तो जीवन का हिस्सा है। बात चाहे दैनंदिनी जीवन की हो या फिर प्रतीकात्मकता की। हर इंसान का जीवन दिन-रात की तरह ही होता है। अंधेरे और उजाले में बंटा हुआ। जैसे दिन और रात है, वैसे ही जीवन में सुख-दुख की तरह... आगे पढ़े

रामकृष्ण परमहंस को गुरु ने क्यों कहा खरा सोना

Updated on 29 May, 2015, 8:13
रामकृष्ण परमहंस शास्त्रों के सभी नियमों का पालन करते हुए तोतापुरी जी के शिष्य बन गए। गुरु शिष्य मर्यादा के अनुसार दीक्षा देने के बाद तोतापुरी जी उन्हें उपदेश देते। परमहंस की आंतरिक स्थिति उत्कट स्तर की थी। एक दिन तोतापुरी ने उनसे कहा, अब तुम अपने मन को निर्विकल्प... आगे पढ़े

हमें ईश्वर भक्ति से जुड़े रहना चाहिए

Updated on 28 May, 2015, 13:28
सीहोर। यदि आपने भगवान श्रीकृष्ण भगवान श्री राम का नाम मुख में स्थापित किया है तो ईश्वर आपकी रक्षा हर जगह करता है। भगवान का भक्त पाखंडी से भी बच जाता है। यह बात पंडित अजय पुरोहित ने श्रीमद् भागवत कथा के दिवस कही। पंडित अजय पुरोहित ने कहा कि... आगे पढ़े

अहं का त्याग है सुख

Updated on 26 May, 2015, 13:26
चेतना की परिधि में की गई कोई भी प्रगति आत्म-विकास है। आत्म-विकास का अर्थ है दुख के मार्ग पर बढ़ते जाना, दुख का अंत करना नहीं। यदि आप इसे ध्यानपूर्वक देखें तो यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि दुख ही हमारे आत्मविकास में सहायक बनते हैं। यदि मन संपूर्ण दुख... आगे पढ़े

जादू की झप्पी से स्नेह की भाषा तक

Updated on 25 May, 2015, 7:46
बात उन दिनों की है जब देश आजाद नहीं था। सन् 1902, महात्मा गांधी को 6 वर्ष का कारावास की सजा हुई उन्हें यरवदा जेल भेजा गया। वहां का जेलर अंग्रेज था। वह गांधीजी को अंग्रेजी साम्राज्य का सबसे बड़ा शत्रु मानता था। इसलिए बापू के लिए जब सेवक देने... आगे पढ़े

जब एक बावर्ची ने उंड़ेल दी बादशाह पर सब्जी

Updated on 24 May, 2015, 8:05
एक बार बादशाह नौशेरवां भोजन कर रहे थे। अचानक खाना परोस रहे बावर्ची के हाथ से थोड़ी सी सब्जी बादशाह के कपड़ों पर छलक गई। बादशाह की त्यौरियां चढ़ गईं। जब बावर्ची ने यह देखा तो वह थोड़ा घबराया, लेकिन कुछ सोचकर उसने प्याले की बची सारी सब्जी भी बादशाह के... आगे पढ़े

मेरा अपना स्तर है, में निंदकों के स्तर तक क्यों जाऊं

Updated on 23 May, 2015, 6:53
रवीन्द्रनाथ टैगोर विशिष्ट कवि थे। वे विचारक ही नहीं, शांत साधक भी थे। वे भयमुक्त थे। उनका स्वभाव बहुत शांत था। लेकिन निंदकों को कौन रोक सका है। कुछ लोग रविन्द्रनाथ टैगोर जी की भी निंदा करते थे। एक बार उनके मित्र शरदबाबू ने टैगोर से कहा, 'मुझे से आपकी यह... आगे पढ़े

एक डॉक्टर का अनोखा प्रयोग

Updated on 22 May, 2015, 12:34
एक अनाथ व निर्धन छात्र एक प्रसिद्ध डॉक्टर के पास जाकर बोला, 'डॉ. साहब, मेरे पेट में पथरी है, आप ऑपरेशन कर दीजिए ।' जांच करने के बाद डॉ. ने कहा, 'ऑपरेशन में दो हजार रुपए खर्च होंगे। आप रुपए जमा करा दीजिए।' छात्र ने कहा, 'डॉ. साहब, में बहुत गरीब... आगे पढ़े

आइए जानें 251 ऐसे सपनें जिसे देखने से मिलता है ये फल

Updated on 22 May, 2015, 12:30
स्वप्न ज्योतिष के अनुसार नींद में दिखाई देने वाले हर सपने का एक ख़ास संकेत होता है, एक ख़ास फल होता है। आइए जानें 251 ऐसे सपनो के स्वपन ज्योतिष के अनुसार संभावित फल । सपने फल 1- आंखों में काजल लगाना- शारीरिक कष्ट होना 2- स्वयं के कटे हाथ देखना- किसी निकट... आगे पढ़े

यकीन कीजिए ईश्वर आपको जरूर मिलेंगे

Updated on 20 May, 2015, 9:12
एक बार संत रामदासजी के पास एक शिष्य आया और उसने पूछा, 'प्रभु मैं कौन सी साधना करूं ?' रामदासजी ने उत्तर दिया, 'कोई भी कार्य करने से पहले यदि तुम यह निश्चय करोगे कि वह भगवान के लिए किया जा रहा है तो तुम्हारे लिए यही साधना उत्तम होगी।' तुम... आगे पढ़े

संसार का नियम

Updated on 19 May, 2015, 12:51
चीन के प्रसिद्ध दार्शनिक लाओ-त्जु (ताओ ते चिंग) की कहानी है। एक दिन वह पहली बार मछली पकड़ने नदी पर गए। दरअसल, वह मछली पकड़ना सीखना चाहते थे। वे अपनी बंसी के हुक में चारा बांधकर नदी में डालकर किनारे छड़ी पकड़कर बैठ गए। कुछ समय बाद एक बड़ी मछली... आगे पढ़े

जहां जीवन है, वहां गति है

Updated on 18 May, 2015, 11:38
योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रिय:। सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते॥5-7॥ अर्थ : अपने मन को वश में करने वाला, जितेंद्रिय, विशुद्ध अंत:करण वाला और सभी प्राणियों को अपना आत्मरूप मानने वाला कर्मयोगी कर्म करता हुआ भी उससे लिप्त नहीं होता है। भावार्थ : निष्काम कर्म को कर्मयोग में सर्वोच्च माना जाता है। जिस प्रकार विज्ञान... आगे पढ़े

मृत्यु के बाद धन नहीं स्वभाव साथ जाता है

Updated on 16 May, 2015, 8:21
साईं प्रज्ञाधाम मंदिर साकेत में सत्संग के अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंद महाराज ने कहा कि यहां भगवान भी विद्यमान हैं, गुरु भी विद्यमान हैं, तत्वज्ञान भी विद्यमान है और व्यक्ति में योग्यता या सामर्थ्य भी विद्यमान है। केवल नाशवान सुख की आसक्ति ने ही उसकी प्राप्ति में बाधा डाल... आगे पढ़े

सुख और शांति के लिए अपने मन के भीतर झांकना चाहिए न कि बाहर

Updated on 16 May, 2015, 8:21
एक बार एक रानी नहाकर अपने महल की छत पर बाल सुखाने के लिए गई। उसके गले में हीरों का एक हार था। उसने उसे उतार कर आले पर रख दिया और बाल संवारने लगी। इतने में एक कौवा आया। उसने देखा कि कोई चमकीली चीज है, वह उसे लेकर... आगे पढ़े

पढ़िए एक आत्मा का खुला पत्र

Updated on 14 May, 2015, 12:18
मृत्यु के बाद मनुष्य का कुछ बाकी रहता है या नहीं ? यदि रहता है, तो किस अवस्था में और कहां रहता है ? परलोक किसे कहते हैं ? और वह कहां है ? ऐसे कई प्रश्न हैं जो आज के आधुनिक दौर में विज्ञान भी तलाश नहीं कर पाया... आगे पढ़े

मान सम्मान से परे एक मर्मस्पर्शी पत्र

Updated on 13 May, 2015, 8:47
सन् 1952 में इज़राइल के प्रथम राष्ट्रपति कैम वीजमान का निधन हो गया तो इज़राइल का राष्ट्रपति पद स्वीकारने के लिए महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन से प्रार्थना की गई। आइंस्टीन ने विनम्रता से उस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया और इज़राइली राजदूत अब्बा एवान को एक पत्र लिखा। वो पत्र कुछ... आगे पढ़े

सुबह सुबह यह दिख जाए तो अपनी आंखें बंद कर लेनी चाहिए

Updated on 12 May, 2015, 12:09
मालवेश्वर भोज को राजसिंहासन पर बैठे कुछ ही दिन हुए थे। एक दिन प्रातःकाल वह अपने रथ पर आसीन होकर राजकीय उद्यान की ओर क्रीड़ा के लिए जा रहे थे। उनका रथ बड़ी तेजी से राजपथ पर बढ़ा जा रहा था। सहसा महाराज भोज ने रथ रोकने का आदेश दिया। वह... आगे पढ़े

ढाई आखर प्रेम का..

Updated on 11 May, 2015, 13:17
संत कबीर के अनुसार, विद्वान होने के लिए मोटी-मोटी पोथियां पढ़ने की नहीं, बल्कि खुद से, खुदा के बंदों से प्रेम करने की जरूरत है। यही पूजा है और यही परमात्मा से मिलन। संत कबीर जयंती (13 जून) पर आलेख.. धर्म के बारे में एक बेहद संजीदा सवाल अक्सर लोगों के... आगे पढ़े

झूठी शान दिखाने पर जाना पड़ सकता है नर्क

Updated on 11 May, 2015, 7:42
हाजी मुहम्मद एक मुस्लिम संत थे। वे कई बार हज यात्रा करके आए थे और नियमित पांचों वक्त की नमाज पढ़ते थे। एक दिन उन्होंने एक स्वप्न देखा, एक फरिश्ता स्वर्ग और नर्क के बीच में खड़ा है और वह सभी प्राणियों को उनके कर्म के अनुसार स्वर्ग और नर्क... आगे पढ़े

दुनिया में आए हो अगर तो मरना ही होगा

Updated on 11 May, 2015, 7:42
कृशा गौतमी श्रावस्ती के निर्धन परिवार में जन्मी थी। जितनी वह निर्धन थी, उतनी ही सुंदर। सुंदरता के कारण उसका विवाह एक धनी व्यक्ति से उसका विवाह हो गया। लेकिन वहां उसका हमेशा अपमान होता था। जब पुत्र हुआ तो सम्मान होने लगा। समय बदला और उसके पुत्र की अचानक ही... आगे पढ़े

हमेशा लगाइए जीत का नुक्ता

Updated on 10 May, 2015, 12:08
जब अब्राहम लिंकन वकालात किया करते थे। उनके पास एक आदमी अपने मुकदमें के कागजात लेकर आया, जिसमें वह लिंकन को अपना वकील बनाना चाहता था। सारे कागज को देखने के बाद लिंकन बोले, हालांकि कानूनी नुक्ते से आपका मुकदमा जीता जा सकता...। और उन्होंने यह कहते हुए सारे कागजात उसे... आगे पढ़े

मनुष्य दुखों से कैसे मुक्त हो

Updated on 8 May, 2015, 12:37
वर्तमान में संसार के लगभग सभी विचारक इस बात को लेकर चिंताग्रस्त हैं कि मनुष्य को दुखों से कैसे मुक्त किया जाए। सभी लोग केवल यही चिंता कर रहे हैं कि मनुष्य दुखों से कैसे मुक्त हो, लेकिन मुक्त होने का प्रयास कोई नहीं कर रहा है। महर्षि पतंजलि जैसे संतों... आगे पढ़े

गुरु अमरदास: सेवा ही धर्म है

Updated on 5 May, 2015, 12:26
तीसरे सिख गुरु अमरदास जी जहां सेवा और समर्पण के आदर्श बने, वहीं धर्म को लोक कल्याण का माध्यम बनाया। कल उनका प्रकाशोत्सव था। इकसठ वर्ष से अधिक आयु के हो चुके थे, जब एक बार प्रात: उनके कानों में गुरुवाणी के बोल पड़े। ये बोल उनके हृदय में उतर... आगे पढ़े

बस यह कहिए.. 'जो होगा, देखा जाएगा'

Updated on 4 May, 2015, 13:04
यदि श्रद्धा नहीं है, तो नहीं है, आप क्या कर सकते हैं? सीधी सी बात है। श्रद्धा भी उपहार है। आप अपने दिल और दिमाग में श्रद्धा थोपने का प्रयास तो नहीं कर सकते। प्रश्न- गुरुदेव, इस पूर्ण विश्वास के साथ कैसे जीवन जिए कि समर्पण करने के बाद गुरु... आगे पढ़े

साधुओं के विषय में क्या कहता धर्म

Updated on 3 May, 2015, 13:05
समाज में हर इंसान को साधु की तरह जीवनयापन करना चाहिए। धर्म साधुओं के विषय में क्या कहता है? जो व्यक्ति मन में सोचते हैं कि मेरे लिए मेरा प्राण जितना प्यारा है और लोगों के लिए भी उनके प्राण भी उतने ही प्यारे हैं, यही समझकर जो दूसरों के... आगे पढ़े

बुद्ध ने कहा था सिर्फ विवेक की सुनो

Updated on 3 May, 2015, 7:25
वैशाख पूर्णिमा गौतम बुद्ध की जयंती है। इस वर्ष यह 4 मई के दिन है। और उनका निर्वाण दिवस भी। इसके अतिरिक्त इसी दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। बोधिवृक्ष के नीचे बैठे अनेक वर्षों तक घोर तपस्या करते-करते गौतम को वैशाख महीने की पूर्णिमा की रात्रि के... आगे पढ़े

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