नई दिल्ली । रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा उत्पादन विभाग, एमओडी के पोर्टल सृजन का शुभारम्भ किया, जो एक ‘वन स्टॉप शॉप’ ऑनलाइन पोर्टल है और यह वेंडर्स (कंपनियों) को ऐसे सामानों की जानकारी देता है, जिनका स्वदेशीकरण किया जा सकता है। आईडीईएक्स के अंतर्गत डिफेंस इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज के लिए 4 अनुबंध किए और रक्षामंत्री की उपस्थिति में उद्योग से जुड़े भागीदारों और रक्षा पीएसयू के बीच चार एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा कई अभिरुचि पत्र/ अनुरोध प्रस्ताव भी जारी किए गए। 
रक्षामंत्री ने कहा कि इन एमओयू और अनुबंधों पर हस्ताक्षर से रक्षा विनिर्माण से संबंधित प्रौद्योगिकी में हमें आत्मनिर्भरता मिलेगी। सिंह ने भारतीय उद्योग से जुड़े भागीदारों से रक्षा क्षेत्र के स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्धता दिखाने और सक्रिय रूप से भागीदारी दिखाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “रक्षा विनिर्माण में आत्म-निर्भरता की कल्पना सिर्फ घरेलू आवश्यकता पूरी करने के लिए ही नहीं, बल्कि निर्यात को ध्यान में रखते हुए भी की गई है और ठोस प्रयासों से ही इसे संभव बनाया जा सकता है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने संस्थानों के निगमीकरण, एफडीआई सीमाओं में सुधार और हाल में आयात के लिए नकारात्मक सूची जारी करने जैसे प्रमुख कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, “कुछ समय पहले तक, अपनी रक्षा खरीद के लिए हम दुनिया में उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ तकनीक की ओर देखा करते थे लेकिन अब हालात बदले हैं। अब हम आधुनिक उपकरणों का विनिर्माण खुद या संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से या तकनीक के हस्तांतरण के माध्यम से करने पर विचार कर रहे हैं। सिंह ने कहा कि इससे उद्योग से संबंधित भागीदारों को रक्षा क्षेत्र में आत्म-निर्भरता का लक्ष्य हासिल करने में सक्रिय भूमिका निभाने में सहायता मिलेगी। 
आत्मनिर्भर भारत की घोषणा के क्रम में रक्षा उत्पादन विभाग, एमओडी ने “रक्षा में मेक इन इंडिया के लिए अवसरों” के रूप में एक स्वदेशी पोर्टल विकसित किया है, जो ऐसे सामानों की जानकारी देगा जिन्हें निजी क्षेत्र स्वदेशीकरण के लिए अपना सकता है। इस पोर्टल पर, डीपीएसयू/ओएफबी/एसएचक्यू अपने ऐसे सामानों का प्रदर्शन कर सकते हैं, जिनका वे आयात कर रहे हैं या आयात कर रहे हैं और भारतीय उद्योग अपनी क्षमता के आधार पर या ओईएम के साथ संयुक्त उपक्रम के माध्यम इन्हें डिजाइन, विकसित और विनिर्माण कर सकता है। भारतीय उद्योग इसमें अपनी दिलचस्पी प्रदर्शित कर सकेंगे। संबंधित डीपीएसयू/ओएफबी/एसएचक्यू अपनी सामानों की आवश्यकता और अपने दिशानिर्देशों व प्रक्रियाओं के आधार पर स्वदेशीकरण के लिए भारतीय उद्योग के साथ संवाद करेंगे।