भोपाल : शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पथ विक्रेता भारतीय जीवन शैली का अभिन्न अंग है। घर के बाहर सड़क से निकलते हुए पथ विक्रेताओं की एक खास अन्दाज में लगायी जाने वाली आवाज घर-घर में पहचानी जाती है। उनकी आवाज से खरीदने वाला बाहर आ जाता है। पथ विक्रेता की आवाज सुनना आदत में शामिल हो जाता है।

कोरोना में लॉकडाउन में लम्बे समय तक पथ विक्रेता चाहे सब्जी वाला हो, फल वाला हो या कोई और, किसी की आवाज सुनाई नहीं पड़ी। खरीदने वाले ने तो जैसे-तैसे अपनी गृहस्थी के लिए आवश्यक चीजें खरीद लीं लेकिन बेचने वाला पथ विक्रेता बेरोजगार हो गया। यह ऐसा वर्ग है जिसकी संख्या बहुत ज्यादा है और इसकी जरूरत भी ज्यादा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान दोनों जमीनी हकीकत से हमेशा जुड़े रहते हैं।

पथ विक्रेताओं की हकीकत को समझते हुए इस वर्ग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के शहरी पथ विक्रेता की बड़ी आबादी को कार्यशील पूँजी उपलब्ध करवाने के लिये प्रधानमंत्री आत्म-निर्भर स्व-निधि की घोषणा की। इस योजना में पंजीकृत शहरी पथ विक्रेताओं को 10 हजार रुपये की क्रियाशील पूँजी उपलब्ध कराई जायेगी। केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा ब्याज अनुदान दिया जायेगा।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने गरीबों की इस योजना को मध्यप्रदेश में सबसे पहले लागू किया। पंजीयन की प्रक्रिया शहरी असंगठित कामगार पोर्टल के माध्यम से की गई। जून 29 की स्थिति में 8 लाख 15 हजार 890 पथ विक्रेताओं का पंजीयन हो गया है। पंजीकृत वेंडर्स के दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में एक हजार करोड़ से अधिक ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना सभी 378 नगरीय निकायों में लागू की जा रही है। योजना में ऐसे पथ विक्रेताओं को शामिल किया जायेगा, जो 24 मार्च, 2020 से पूर्व से शहरी क्षेत्रों में पथ विक्रेता का कार्य करते हैं। निकाय का टाउन वेंडिंग सर्टिफिकेट और पहचान-पत्र होने पर यह लाभ मिलेगा। ऐसे पथ विक्रेता, जो कोरोना महामारी के कारण अपने स्थान को छोड़कर चले गये हैं और वे पुन: लौटते हैं, तो उन्हें भी इस योजना के लाभ की पात्रता होगी।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 6 जून को ही मुख्यमंत्री शहरी असंगठित कामगार एकीकृत पोर्टल का शुभारंभ कर पंजीयन की प्रक्रिया प्रारंभ की थी। योजना के क्रियान्वयन के लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग में राज्य-स्तरीय समिति का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 23 जून को सम्पन्न राज्य-स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में पथ विक्रेताओं के लिये प्रधानमंत्री आत्म-निर्भर स्वनिधि योजना के बैंकवार लक्ष्य निर्धारण और क्रियान्वयन की प्रक्रिया सुनिश्चित कर दी गई है।

पंजीयन करवाने वाले पथ विक्रेताओं में से लगभग 28.36 प्रतिशत सब्जी, 10.27 प्रतिशत कपड़े, 7.23 प्रतिशत फल और 6.84 प्रतिशत खाने-पीने की वस्तुओं का व्यवसाय करते हैं। पंजीकृत पथ व्यवसाइयों में 62 प्रतिशत पुरुष और 38 प्रतिशत महिलाएँ हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये हैं कि प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्व-निधि योजना में लाभ लेने के लिए पात्र पथ व्यवसायी को भटकना नहीं पड़े। श्री चौहान ने पथ व्यवसाइयों की पीड़ा को महसूस किया और उनके रोजगार को पुन: शुरू करवाने के लिए जरूरी व्यवस्थायें सुनिश्चित की। योजना के क्रियान्वयन के लिए 25 करोड़ रूपये के बजट का प्रावधान भी कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शहरों की महिलाओं को स्व-सहायता समूह के माध्यम से स्व-रोजगार स्थापित करने के अवसर प्रदान के उद्देश्य से सभी 378 नगरीय निकायों में दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन शुरू करने का भी निर्णय लिया है। अभी यह योजना मात्र 120 नगरीय निकायों में संचालित है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह मिशन क्षमता संवर्धन, स्वरोजगार, कौशल प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा तथा संस्थागत विकास के द्वारा शहरी गरीबों को आजीविका के साधन उपलब्ध कराएगा। इस मिशन में शहरी बेघरों को आश्रय और पथ व्यवसाइयों के लिए हाकर्स कार्नर भी विकसित किये जायेंगे। योजना में स्व-सहायता समूह को अनुदान और ऋण उपलब्ध करवाया जायेगा। इनके द्वारा बनायी जाने वाली सामग्री के विपणन की भी व्यवस्था सरकार द्वारा की जायेगी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान की मंशा है कि प्रदेश का कोई भी व्यक्ति बेरोजगारी की पीड़ा को नहीं झेले। श्री चौहान का मात्र एक ही उद्देश्य है, जन कल्याण। इसे कार्यरूप में परिणति करने के लिए वे सतत संवाद और विमर्श करते रहते हैं। कई योजनायें तो उन्होंने विभिन्न वर्गो की पंचायतों में आये सुझावों के आधार पर ही बनायी हैं।