भोपाल : किसी भी सरकार का धर्म है कि जो गरीब है, दीन है, दुखी है, पिछड़े है उनको विशेष सुविधाएँ दी जाये। महात्मा गांधी लगातार कहते थे कि सरकार का पहला काम निर्धनों की सेवा है। पूज्य डॉ. हेडगेवार ने कहा था कि नर सेवा ही नारायण सेवा है, पंडित दीनदयाल उपाध्याय कहते थे कि दरिद्र ही नारायण है, गरीब ही भगवान है, उनकी सेवा भगवान की पूजा है। मध्यप्रदेश सरकार इन्हीं महापुरूषों के बताये रास्ते पर चल रही है। गरीबों के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पूर्व में ही शुरू की गई मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना को फिर से शुरू किया गया। फिर से इसलिए शुरू किया गया क्योंकि पिछले सरकार ने इस योजना को ठंडे बस्ते मे डाल दिया था।

कोरोन संकट के बीच महामारी से जूझ रहे लोगों की जिन्दगी में संबल देने वाली, सहारा देने वाली योजना संबल, गरीब जनता की जिंदगी में नये प्रकाश के रूप में आयी है। संबल केवल योजना नही है बल्कि गरीबों का सहारा है संबल, बच्चों का भविष्य है संबल, माँ, बहन, बेटियों का सशक्तिकरण है संबल। जीवन की कठिन लड़ाई में ऐसे गरीब भाई बहनों जो आर्थिक रूप से संपन्न नही है उन्हें सहारा चाहिए, साथ और सहयोग चाहिए। संबल योजना इसीलिए लागू की गई है। इस योजना के माध्यम से गरीबों को न्याय मिल रहा है, यही सामाजिक न्याय है।

संबल योजना में पहले कार्ड बने थे। योजना शुरू होते ही सभी पंजीकृत हितग्राहियों को लाभ मिलने लगा। संबल योजना ऐसी है जो जन्म से जीवन पर्यन्त तक हितग्राहियों को लाभ पहुँचाती है। संबल योजना के पात्र बहन को बेटा, बेटी जन्म देने के पहले 4 हजार रूपये और जन्म देने के बाद 12 हजार रूपये उनके खाते में दिये जाते है। यह सहायता बहनों को आराम करने का अवसर देती है और पोषण आहार भी मिलता है। इस योजना में बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था भी की गई है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान बच्चों के मामा कहे जाते हैं। संबल में पढ़ाई की नि:शुल्क व्यवस्था की गई है। किताबें, आठवीं तक यूनिफार्म् और मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था रहती है। मुख्यमंत्री ने एक नई योजना इसमें जोड़ी है, संबल परिवार के ऐसे बच्चे जो 12वीं में मेरिट में आते है ऐसे 5 हजार बच्चों को 30 हजार रूपये प्रति विद्यार्थी अलग से दिये जायेगें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान का कहना है कि मेडिकल, इंजीनियरिंग, आईआईटी, आईआईएम में गरीब बच्चों का चयन हो जाता है तो फीस भरना उसके बूते की बात नही हैं, इसलिए सरकार फीस की व्यवस्था करती है। पढ़ाई के साथ ही खेल में बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए नई योजना शुरू की गई है, इसके अंतर्गत संबल परिवार के बच्चों जो ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी कॉम्पिटिशन या राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे उन्हें 50 हजार प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है।

संबल योजना में गरीबों को सस्ते दर पर बिजली तथा बीमारी के लिए सहायता भी दी जाती है। पंजीकृत व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु होने पर 4 लाख रूपये की राशि परिवार के सहारे के लिए दी जाती है। सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रूपये, अंतिम संस्कार के लिए 5 हजार रूपये की व्यवस्था संबल में की जाती है। आंशिक स्थाई अपंगता पर भी आर्थक सहायता संबल के तहत मिलती है। संबल गरीब के लिए एक पूरा पैकेज है, ऐसी योजना देश में किसी भी राज्य में नही हैं। समाज में नीचे खड़े व्यक्ति को बराबर पर खड़े करने के लिए यह योजना एक संबल है। मार्च से 20 जून की स्थिति में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 25 हजार 171 योजना के हितग्राहियों को 151 करोड़ 13 लाख की सहायता दी है।

मध्यप्रदेश देश का एकमात्र ऐसा बिरला प्रदेश होगा, जहां गरीब वर्ग की जन्म से लेकर मृत्यु तक होने वाले व्यय की जिम्मेदारी शासन उठाता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान की संवेदनशील सोच से उपजी संबल योजना में यह सब कवर होता है। गरीबों के प्रति हमेशा मन में चिंता लिए श्री चौहान यह चाहते हैं कि प्रदेश का कोई भी गरीब परिवार असहाय स्थिति में किसी के आगे न गिड़गिड़ाये। इसलिए गरीब परिवार के घर में होने वाली प्रसूति, बच्चे का जन्म, बच्चों की पढ़ाई के साथ परिवार के किसी सदस्य की दुर्घटना में मृत्यु, सामान्य मृत्यु, दुर्घटना में हुई स्थाई और अस्थाई अपंगता के साथ अंत्येष्टि सहायता भी संबल योजना में उपलब्ध करवाई जाती है।

चौथी बार मुख्यमंत्री की कमान संभालने के बाद श्री चौहान के मन में एक बड़ी टीस थी कि उन्होंने अपने पूर्व कार्यकाल में गरीबों को संबल देने के लिए जो योजना शुरू की थी उसे पूर्व सरकार द्वारा बिना सोचे-समझे बंद कर गरीबों के साथ नाइंसाफी की है। योजना को पुन: प्रारंभ करते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि संबल केवल योजना नहीं है यह गरीबों का सहारा है, बच्चों का भविष्य, बुजुर्गों का विश्वास है, मां बहन बेटियों का सशक्तिकरण है और गरीब जनता की जिंदगी में नया प्रकाश है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान संबल योजना को न्याय का माध्यम मानते हैं उनका कहना है कि जो धन कमाते हैं, सरकार उनसे टैक्स लेती है और उससे गरीब जरूरतमंदों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाती है यही सामाजिक न्याय है, जो हमारे देश में वर्षों से चला आ रहा है। गरीब भगवान का स्वरुप है और उनकी सेवा भगवान की पूजा के समान है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में संबल योजना का प्रावधान किया गया।