इस्लामाबाद | कश्मीर का मुद्दे लेकर हर दर से निराश होकर लौटे पाकिस्तान का दिल एक बार फिर तुर्की ने ही बहलाया है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान ने पाकिस्तानी समकक्ष आरिफ अल्वी और प्रधानमंत्री इमरान खान से फोन पर बात करते हुए भरोसा दिलाया कि उनका देश कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़ा है। हालांकि, तुर्की इससे पहले भी कई बार पाकिस्तान को इस तरह का आश्वासन दे चुका है, लेकिन पाकिस्तान जानता है कि विश्व समुदाय भारत के साथ खड़ा है और इक्का-दुक्का देशों का समर्थन उसके लिए दिल बहलाने से अधिक कुछ नहीं है। 

तुर्की के राष्ट्रपति ने ईद के मौके पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री इमरान खान से फोन पर बात की। और कई मुद्दों पर उनकी चर्चा हुई। पाकिस्तान के राष्ट्रपति के दफ्तर की ओर से ट्वीट किया गया, ''राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान के बीच ईद-उल-अजहा के अवसर पर फोन पर बात करते हुए एक दूसरे को मुबारकबाद दी। कश्मीर और कोविड-19 जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। पाकिस्तान UNGA के सामने राष्ट्रपति एर्दोगान के स्पष्ट बयान की तारीफ करता है।''

एक अन्य ट्वीट में अल्वी ने कहा, ''तुर्की के राष्ट्रपति ने भरोसा दिया कि उनका देश कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के स्टैंड का समर्थन करेगा क्योंकि भाई-भाई जैसे दोनों देशों के लक्ष्य एक हैं।'' पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के दफ्तर की ओर से भी इन बातों को दोहराया गया है। 

तुर्की ने कश्मीर पर ये बातें ऐसे समय में कही हैं, अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने की पहली वर्षगांठ तीन दिन बाद ही है। पिछले साल 5 अगस्त को जब मोदी सरकार ने यह अहम फैसला लिया तो पाकिस्तान ने खूब छाती पीटी। उसने कई देशों से संपर्क किया, लेकिन सभी ने उसे यह कहकर लौटा दिया कि यह भारत का अंदरुनी मामला है। पाकिस्तान सरकार ने कई बार इसे स्वीकार भी किया कि वह इस मुद्दे पर अलग-थलग पड़ चुका है।

हालांकि, तब तुर्की और मलेशिया ने पाकिस्तान का साथ देने का ऐलान किया था। भारत ने तुर्की को जवाब देते हुए कहा था कि वह कश्मीर मुद्दे पर अपनी समझ विकसित करे और भारत के अंदरुनी मामलों में दखल देने की कोशिश ना करे। तुर्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर मुद्दा उठाया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रस्तावित तुर्की यात्रा को रद्द कर दिया था। भारत सरकार ने मलेशिया और तुर्की से आयात पर पाबंदी का भी फैसला किया था। तुर्की को भारतीय नौसेना के लिए वॉरशिप बनाने की डील गंवानी पड़ी थी।