काठमांडू | अपनी ही पार्टी में घिर चुके नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने शुक्रवार को अपने इस्तीफे की संभावना को खारिज करते हुए पार्टी में फूट को दबाने की कोशिश की। ओली धैर्य और संयम की जरूरत बताते हुए कहा कि राजनीतिक मुद्दों का फैसला बातचीत के जरिए किया जाएगा। कोविड-19 को लेकर देश को संबोधित करते हुए ओली ने कहा कि सरकार को लोगों की जिंदगी बचाने के लिए अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। चीन के हाथों की कठपुतली कहे जा रहे ओली ने यह भी कहा कि पार्टी का विवाद आंतरिक मुद्दा है। ओली का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनकी सरकार बचाने के लिए चीन खुलेआम दखल दे रहा है। 

ओली ने कहा, ''आंतरिक विवादों या समस्याओं में शामिल होकर कोई लोगों की जिंदगी बचाने के कर्तव्य से नहीं हट सकता है। मैंने हमेशा कहा है कि सरकार लोगों को बीमारी और भूख से बचाने में पीछे नहीं हटेगी। इसलिए मेरे नेतृत्व में सरकार लोगों की जिंदगी और संपत्ति को महामारी और आपदा से बचाने की कोशिश कर रही है।'' ओली सरकार कोविड-19 को लेकर इंतजामों में नाकामी को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं।
 उन्होंने यह कहते हुए एकता बढ़ाने की अपील की कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति से स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ गई होगी। भारत के साथ सीमा विवाद बढ़ाने वाले ओली ने कहा कि वह राष्ट्रीय आत्मसम्मान को ऊंचा उठाने और देश की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए मजबूती से खड़े रहेंगे। सत्ताधारी पार्टी में फूट को लेकर उन्होंने कहा कि राजनीतिक मुद्दों ने लोगों का ध्यान जरूर खींचा होगा, लेकिन ये आंतरिक मुद्दे हैं और आंतरिक रूप से ही सुलझा लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी पार्टी में विवाद और चर्चा आंतरिक मुद्दे हैं।

ओली ने कहा, ''महामारी और राष्ट्रीय आपता के समय राजनीतिक मुद्दा उठना नया नहीं है। किसी भी पार्टी में विवाद और चर्चा आंतरिक मुद्दे हैं। राजनीतिक दल और नेताओं की जिम्मेदारी मुद्दों को चर्चा के जरिए सुझलाने की होती है। इस तरह की चर्चाएं, सलाह और विरोध पूरी तरह से आंतरिक होते हैं और कई बार बेहद सामान्य। ये मुद्दे पार्टी और नेताओं द्वारा सुलझा लिए जाएंगे। इसके लिए संयम और धैर्य रखने की जरूरत है।

गौरतलब है कि नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी में इन दिनों ओली अल्पमत में हैं। पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड सहित सभी बड़े नेता ओली से इस्तीफा मांग रहे हैं। इस बीच नेपाल में चीन की राजदूत हाउ यांकी खुलेआम दखल देकर कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं को एकजुट रखने की कोशिश कर रही हैं।