गोपालदास बंसल, 9131886277
अटल संदेश
शहडोल। रेल मंत्रालय द्वारा देशभर के विभिन्न स्टेशनों से 01 जून 2020 से करीब 100 जोड़ा अर्थात 200 यात्री गाड़ियां शुरू करने की घोषणा की गई है। घोषणा के मुताबिक आदिवासी प्रधान अंचल से रेलवे मंत्रालय द्वारा घोषित किसी भी ट्रेन की आवाजाही नहीं होगी। यह खबर शहडोल संभाग के तीनों जिलों के नागरिकों, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में निवास कर रहे युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों तथा अधिकारियों आदि के लिए दुखदायक है।
इस खबर को सुनने के बाद अधिकांश लोग यह कहते सुने गए कि शहडोल में इंसान नहीं रहते हैं, लगता है कि इस संभाग के प्रतिनिधित्व की कमान जिन्हें सौंपी गई है उनका यहां कि जनता से कोई वास्ता ही नहीं है।
हद तो तब हो जाती है,जब यहां के जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक, सत्ता पक्ष व विपक्ष के तमाम नेतागण, नागरिक आदि भी इस बारे में मौन धारण किए हुए हैं।


इस मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 100 जोड़ी ट्रेनों में एक भी ट्रेन हमारे संभाग से नहीं गुजरेगी, ऐसे में लगता है कि हमारे जनप्रतिनिधि या तो सो गए हैं या उन्हें अपने क्षेत्र की तनिक भी परवाह नहीं है। 
  
मुख्यमंत्री ने गोद लिया था शहडोल को
महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अपने पिछले मुख्यमंत्री काल में जब शहडोल को संभाग घोषित किया गया था ,उस समय उन्होंने शहडोल संभाग को गोद लेने की बात की थी। इस क्रम में उन्होंंने शहडोल को इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज तथा विश्वविद्यालय की सौगात दी थी जो वर्तमान में पूर्ण हो चुके हैं।

कई जन प्रतिनिधियों नें जताई नाराजगी
मुख्यालय के मध्य प्रदेश मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष, सामाजिक कार्यकर्ता, पूर्व सांसद प्रतिनिधि व प्रदेश भाजपा सदस्य शानउल्ला खान ने बताया कि इस आदिवासी अंचल में कोरोना वायरस के दौरान किसी भी ट्रेन की आवाजाही ना होना अत्यंत दुखद है। यह शहडोल से भेदभाव बरतने जैसा है। माननीय रेल मंत्री से गुजारिश है कि इस क्षेत्र में अतिशीघ्र 01 जून से ही ट्रेनों की आवाजाही की घोषणा की जाए।
इसी क्रम में अनेक नागरिकों की प्रतिक्रियाएं मिली है । कुछ लोगों ने कहा कि यहां के जनप्रतिनिधि खासतौर पर कांग्रेस के पूर्व वित्त राज्य मंत्री स्व दलबीर सिंह की पुत्री श्रीमती हिमाद्री सिंह जब यहां की सांसद है ,तब यह हाल है। उनका यह कर्तव्य बनता है कि कल्याणकारी परंपरा को कायम रखते हुए ,इस मामले में रेल मंत्री से पुरजोर गुजारिश करें कि यहां हर हालत में ट्रेन चलाई जाए।
देखना यह है कि क्या यहां के जनप्रतिनिधि, तमाम पक्ष विपक्ष के राजनेता, सामाजिक संगठन के मुखिया, विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी आदि क्या कदम उठाते हैं या फिर सब कुछ चलता है की तर्ज पर सब कुछ सहते रहेंगे।