सरकार के कर्मचारी और उनके परिजन कोरोना का इलाज निजी अस्पतालों में करवा सकेंगे। उनके इलाज में लगने वाली टैबलेट फेविपिरावियर, इंजेक्शन रेमडेसिविर जैसी महंगी दवाइयों सहित सभी खर्च का भुगतान सरकार करेगी। इसके लिए कर्मचारियों को खर्च का हिसाब-किताब अपने विभाग के माध्यम से जिले के सिविल सर्जन या अस्पताल अधीक्षक को भेजना होगा। यहीं से मेडिकल बिलों के भुगतान की कार्रवाई होगी। यह व्यवस्था सिर्फ सरकारी कोरोना मरीजों के लिए ही है। स्वास्थ्य आयुक्त संजय गोयल ने इससे संबंधित आदेश जारी कर दिए हैं। यदि कर्मचारी सामान्य परिस्थितियों में बीमार होते हैं, तो उन्हें सरकार से अनुबंधित 101 निजी अस्पतालों में इलाज मिलेगा। सरकारी अस्पतालों में इलाज का भुगतान सरकार नहीं करेगी।