बीजिंग । जानलेवा कोरोना वायरस महामारी के बाद अब चीन के इनर मंगोलिया में ब्यूबोनिक प्लेग का मामला सामने आने के बाद दुनिया भर में एक नई महामारी की आशंकाओं ने जन्म ले लिया है। उधर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि वो चीन में ब्यूबोनिक प्लेग के मामले पर सतर्कता से नज़र बनाए हुए है। डब्ल्यूएचओ ने ये भी कहा है कि अभी हालात 'ज़्यादा ख़तरनाक' नहीं हैं और चीन ने काफी बढ़िया तरीके से मामले को संभाल लिया है। डब्ल्यूएचओ की प्रवक्ता मार्गेट हेरिस ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया, चीन और मंगोलिया प्रशासन के साथ मिलकर हम लगातार इस पर नजर रख रहे हैं। अभी हमें नहीं लगता कि ब्यूबोनिक प्लेग का खतरा ज्यादा है लेकिन, सावधानी बरतते हुए मॉनिटरिंग की जा रही है और पैनिक जैसी कोई बात नहीं है।
ब्यूबॉनिक प्लेग लिंफ़नोड्स में सूजन पैदा कर देते हैं। शुरुआत में इस बीमारी की पहचान मुश्किल होती है क्योंकि इसके लक्षण तीन से सात दिनों के बाद दिखते हैं और किसी दूसरे फ़्लू की तरह ही होते हैं। बता दें कि नवंबर 2019 में इसके 4 मामले सामने आए थे जिसमें प्लेग के 2 खतरनाक स्ट्रेन मिले थे। इसे न्यूमोनिक प्लेग कहा गया था। चीन के इनर मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र के एक शहर में ब्यूबॉनिक प्लेग का एक मामला सामने आने के बाद चिंताएं बढ़ गई थीं। ख़बरों के मुताबिक़ बायानूर शहर में मिला मरीज़ एक चरवाहा है और उन्हें क्वारंटीन में रखा गया है। मंगोलिया में विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया था कि वहां मान्यता है कि मैरमोट के कच्चा मीट और किडनी सेहत के लिए लाभदायक हैं। मैरमोट प्लेग के बैक्टेरिया के वाहक होते हैं। इनका शिकार करना ग़ैरक़ानूनी है। 
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक यह एक बेहद संक्रामक बीमारी है जो येरसीनिया पेस्टिस नाम के बैक्टीरिया से फैलती है। यह बैक्टीरिया चूहे के शरीर में चिपके परजीवी पिस्सू में पाया जाता है, ये एक जानलेवा बीमारी है। आमतौर पर प्लेग दो तरह का होता है - न्यूमोनिक और ब्यूबोनिक। शुरूआती संक्रमण को ब्यूबोनिक प्लेग कहते हैं, लेकिन जब बैक्टीरिया फेफड़ों तक पहुंचता है तो हालत गंभीर हो जाती है ये न्यूमोनिक प्लेग में तब्दील हो जाता है। चूहों के शरीर पर पलने वाले कीटाणुओं की वजह से प्लेग की बीमारी फैलती है। प्लेग के मरीज की सांस और थूक के के संपर्क में आने वाले लोगों में भी प्लेग के बैक्टीरिया का संक्रमण हो सकता है। ग के लक्षण भी कुछ-कुछ कोरोना संक्रमण जैसे ही होते हैं। इस दौरान बुखार, ठंड लगना, पूरे शरीर में दर्द रहना, कमजोरी महसूस करना, उल्टी आना जैसे इसके लक्षण दिखते हैं। ब्यूबोनिक प्लेग में लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाती है और बुखार रहता है जबकि न्यूमोनिक प्लेग में संक्रमण होने पर सांस लेने में तकलीफ होने के साथ खांसी आती है। ब्यूबोनिक प्लेग में मौत का खतरा 30 से 60 फीसदी तक होता है, जबकि न्यूमोनिक प्लेग के मामले में इलाज न मिलने पर मौत हो सकती है। इसका इलाज स्ट्रेप्टोमाइसिन और टेट्रासायक्लाइन जैसी दवाइयों से प्लेग का प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है। कोरोना की ही तरह प्लेग भी एक संक्रमित इंसान से दूसरे इंसान में ड्रॉपलेट्स के जरिए फैलता है। मरीज की मौत के बाद भी उसके शरीर के सम्पर्क में आने पर संक्रमण का खतरा रहता है। बता दें कि इस ब्यूबोनिक प्लेग को 'काली मौत' के नाम से भी जाना जाता है, जो चूहों से फैलता है।