टिकटॉक बैन होने का सबसे ज्यादा फायदा देश में सिर्फ घरेलू ऐप्स को ही नहीं मिला है। बल्कि ऐसे चीनी ऐप्स के डाउनलोड्स में भी तेजी आई है जिन्हें बैन नहीं किया गया है।

भारत में टिकटॉक को बैन हुए तीन हफ्ते से ज्यादा का समय हो चुका है। इस दौरान भारतीय शॉर्ट-विडियो ऐप Roposo ने सबसे ज्यादा करीब 142 फीसदी की बढ़त हासिल की है। InMobi के मालिकाना हक वाली रोपोसो ने बाइटडांस के मालिकाना हक वाले प्लैटफॉर्म के बैन होने के बाद सबसे ज्यादा डाउनलोड हासिल किए।
खास बात है कि इस रेस में दूसरे और तीसरे नबर पर चीन और यूएस के ऐप्स हैं। चीन का Zili ऐप रोपोसो के बाद सबसे ज्यादा डाउनलोड हुआ और इसकी मालिकाना कंपनी शाओमी है। वहीं इसके बाद अमेरिका के Dubsmash को सबसे ज्यादा बार डाउनलोड किया गया। इससे यह पता चलता है कि टिकटॉक का फायदा पूरी तरह से सिर्फ भारतीय ऐप्स को ही नहीं हुआ है। यह डेटा सेंसरटॉवर की रिपोर्ट पर आधारित है। इस रिपोर्ट में 59 चीनी ऐप्स के बैन होने के तीन हफ्ते पहले और तीन हफ्ते बाद की ग्रोथ की तुलना की गई।

चीनी ऐप्स के बैन का फायदा रोपोसो को मिला
कुल मिलाकर, इन तीनों ऐप्स ने टिकटॉक बैन के बाद डाउनलोड के मामले में 155 प्रतिशत की बढ़त देखी। बता दें कि ऐसा तब हुआ है जबकि भारतीय ऐप्स जैसे चिंगारी और Trell भारत में टिकटॉक बैन होने का फायदा उठाने की कोशिश में हैं और इनके डाउनलोड्स में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। पिछले महीने बैन हुए 59 चीनी ऐप्स में डाउनलोड्स के मामले में टिकटॉक सबसे आगे था। भारत में 120 मिलियन मंथली ऐक्टिव यूजर्स के साथ कुल 200 मिलियन डाउनलोड्स टिकटॉक के थे।

सेंसरटावर की रिपोर्ट के मुताबिक, बैन के बाद से Roposo, Zili और Dubsmash ने करीब 2 करोड़ 20 लाख डाउनलोड हासिल किए। यह आंकड़ा 2020 के पहले 6 महीने में भारत में टिकटॉक के इंस्टॉल का सिर्फ 13 फीसदी के करीब है। चीन और भारत के बीच चल रहे विवाद के बीच सरकार ने इन 59 ऐप्स को बैन किया, इनमें ई-कॉमर्स कंपनी Club Factory भी शामिल है।

19 जुलाई तक तीन हफ्तों में रोपोसो को करीब 1 करोड़ 30 लाख, Zili को 80 लाख और Dubsmash को 6 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया। ऑल-टाइम इंस्टॉल देखें तो रोपोसो को अभी तक 7 करोड़ 10 लाख, जिली को 5 करोड़ 10 लाख डब्समैश को 3 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है।

इस डेटा में गूगल और ऐपल ऐप स्टोर्स का आंड़ा शामिल है। इससे संकेत मिलते हैं कि भारतीय ऐप्स के लिए यूएस या उन चीनी प्लैटफॉर्म से कड़ी टक्कर मिल रही है जो भारत में बैन नहीं हैं। भारत की सरकार ने भी स्थानीय डिवेलपर्स से ज्यादा से ज्यादा घरेलू ऐप्स डिवेलप करने को कहा है।