भोपाल । प्रदेश में 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव पर कोरोना का इफेक्ट देखने को मिलेगा। खासकर मतदान पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। सूर्य की तपिश व शीतलहर में मतदाता अपने मत का उपयोग करने से हिचकिचाता है। अब सवाल है कि कोरोना खौफ के बीच वह वोट डालने के लिए मतदान केंद्र तक जाने की कैसे हिम्मत जुटा पाएगा? इस सवाल ने सियासी दलों के साथ चुनाव आयोग व जिला प्रशासन को भी चिंता में डाल दिया है। प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर कोरोना संक्रमण काल में चुनाव होना तय है। संक्रमण के चलते देश की आधी आबादी महिलाएं व वृद्धजन पिछले तीन महीनों से घरों के अंदर हैं। युवा भी संक्रमण से डरा हुआ है।एक अनुमान के तहत उपचुनाव में वोटिंग बमुश्किल 40 से 45 प्रतिशत ही हो पाएगी। ऐसे में भाजपा व कांग्रेस के सामने मतदाता को वोट डालने के लिए मतदान केंद्र तक ले जाना बड़ी चुनौती होगी। इसी कारण दोनों प्रमुख दलों के रणनीतिकार मतदान केंद्र के कार्यकर्ता पर फोकस कर चुनाव लडऩे की रणनीति बना रहे हैं। दोनों दल अभी से कम वोटिंग प्रतिशत में अपने नफा-नुकसान का गणित लगा रहे हैं। भाजपा व कांग्रेस कोरोना संक्रमण काल को ध्यान में रखते हुए अपने चुनाव-प्रचार की रणनीति बना रहे हैं। इसलिए दोनों दलों ने मतदान केंद्र पर फोकस कर रखा है।

भाजपा की 10 प्लस 1 की रणनीति
भाजपा नेताओं का कहना है कि काफी हद तक कोरोना संकट के बादल छंटने पर चुनाव कराए जाएंगे। हालांकि संक्रमण का डर तो लोगों में फिर ही रहेगा। इसी बात को ध्यान में रखकर पार्टी ने चुनाव की रणनीति बनाई है। पार्टी के लिए चिंता की बात इसलिए नहीं है, क्योंकि भाजपा कार्यकर्ता वोट डलवाने में सिद्धहस्त है और उसकी घर-घर तक पकड़ है। मतदान केंद्रों तक कार्यकर्ताओं की तैनाती की रूपरेखा पहले से तैयार है। मतदान केंद्र पर भाजपा का 10 प्लस 1 कार्यकर्ता की तैनाती रहेगी। वहीं महिला मोर्चा 5 प्लस 2, युवा मोर्चा 5 प्लस 1 व अन्य प्रकोष्ट भी इसी तरह से मतदान केंद्र पर काम करेंगे।

कांग्रेस ने पर्चा टीम तक गठित की
उपचुनाव के संबंध में कांग्रेस का कहना है कि वैसे तो कोरोना का प्रभाव कम होने के बाद चुनाव आयोग उपचुनाव कराने का फैसला लेगा। कांग्रेस भी संक्रमण को ध्यान में रखते हुए चुनाव की रणनीति बना रही है। पार्टी की जिले से लेकर पर्चा प्रभारी तक मजबूत कड़ी है। जिले के बाद ब्लॉक, मंडलम, सेक्टर व उसके बाद पर्चा प्रभारी बनाए गए हैं। जो कांग्रेस के वोटर को मतदान केंद्र तक लाने का पूरा प्रयास करेंगे। कांग्रेस के नेता केंद्र स्तर पर कार्य करने वाले कार्यकर्ता से संवाद कर उसे मानसिक रूप से तैयार कर रहे हैं, क्योंकि एक-एक वोट से सरकार का भविष्य तय होना है। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा ने जिस खरीद-फरोख्त का सहारा लेकर सरकार गिराई है। इससे लोगों में आक्रोश नजर आ रहा है

चुनाव आयोग भी कर रहा है तैयारी
बदले हालातों में चुनाव आयोग भी उपचुनाव कराने की तैयारी कर रहा है। संक्रमण के बीच वोटिंग कराना आयोग व जिला प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती है, क्योंकि मतदान केंद्र पर सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन कराना है। वोटर को सैनिटाइज करना है। आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती संक्रमित व्यक्ति अगर वोट डालने की मांग करता है तो उसका मतदान कैसे कराया जाए? इसका रास्ता फिलहाल तलाशा जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में विधायक के संक्रमित होने पर वोट डालने के लिए पीपीई किट उपलब्ध कराई गई थी।