नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में परिसीमन प्रक्रिया को एक साल के अंदर पूरा करने का फैसला किया है। अनुमान लगाया जा रहा है ‎कि परिसीमन में जम्मू क्षेत्र की करीब सात सीटें बढ़ेंगी जिससे इस क्षेत्र का केंद्र शासित प्रदेश में राजनीतिक दबदबा बढ़ जाएगा। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक परिसीमन आयोग का गठन किया है। परिसीमन आयोग जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत राज्य में नए सिरे से विधानसभा और लोकसभा सीटों को तय करेगा। गौरतलब है ‎कि पिछले साल अगस्त में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को समाप्त कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार राज्य विधानसभा की मौजूदा 85 सीटों में सात सीटें और जुड़ेंगी। उच्च स्तरीय सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लिए निर्धारित की गईं 24 सीटों में कोई बदलाव नहीं होगा। मौजूदा समय में विधानसभा में कश्मीर क्षेत्र से 46 सीटें और जम्मू क्षेत्र से 37 सीटें हैं। इनके अलावा दो नामित सदस्य भी होते हैं। केंद्र द्वारा बनाया गया परिसीमन जम्मू-कश्मीर चार उत्तर-पूर्वी राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मणिपुर में भी विधानसभा सीटों का परिसीमन करेगा। जानकारी के मुताबिक जिस जम्मू क्षेत्र से 1990 के दशक में सबसे ज्यादा पलायन हुआ था, उसकी विधानसभा में ज्यादा बड़ी हिस्सेदारी होगी। हिंदू बहुल जम्मू क्षेत्र ने 1989 में आतंकियों के डर से बड़ी संख्या में हिंदुओं का पलायन देखा है।