बिलासपुर । देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना उज्जवला योजना में जमकर भ्रस्टाचार का खुलासा हुआ है जिसमे गरीबो को मुफ्त में मिलने वाले गैस कनेक्शन में गैस कनेक्शन वितरकों ने जमकर घोटाला किया , गरीब हितग्राहियों से गैस कनेक्शन का फार्म भरवाने और गैस कनेक्शन की स्वीकृति मिलने के बावजूद हितग्राहियों को उनके हिस्से के गैस चूल्हा और सिलेंडर नहीं दिए गए, गरीबों के साथ किए गए इस धोखाधड़ी का पता तब चला जब कोरोना काल में केंद्र सरकार ने सभी गैस कनेक्शन धारकों को गैस रिफिल कराने के लिए 800 रुपये उनके खाते में जमा कराए, तब हितग्राहियों को गैस कनेक्शन और उनके साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला.. मामला सामने आने के बाद अधिकारी मामले में जांच के बाद कार्यवाही की बात कह रहे हैं।
मामला नवगठित जिले गौरेला पेंड्रा मरवाही का है।जहां पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूर दृष्टि जिसमे ग्रामीण क्षेत्रो में रहने वाली गरीब महिलाओं को लकड़ी और कंडे से खाना बनाने में हो रही परेशानी से बचाने के लिए केंद्र की महत्वाकांक्षी बड़ी योजना उज्ज्वला योजना में जिले में जमकर घोटाला किया गया है यहां गरीब बीपीएल सूची के हितग्राहियों से कई बार फार्म भरवाए गए , गैस कनेक्शन स्वीकृत होने के बावजूद उन्हें हर बार यह कहकर लौटा दिया गया कि आपका गैस कनेक्शन स्वीकृत नहीं हुआ है भोले भाले आदिवासी ग्रामीण गैस वितरकों के बहकावे में आकर उनकी बात पर विश्वास कर लिया और किसी तरह ये गरीब हितग्राही लकड़ी और कंडे से ही भोजन बनाने के लिए आश्रित हो गए, महिलाएं उसी तरह मिट्टी के चूल्हे में लकड़ी लगा कर मुंह से फूंक फूंक कर परंपरागत तरीके से भोजन बनाने को मजबूर हो गई पर जब कोरोना काल में लॉक डाउन की अवधि शुरू हुई तब केंद्र की ओर से जारी किए गए भारी-भरकम राहत पैकेज में इन गरीब उज्जवला गैस कनेक्शन धारकों के गैस रिफिलिंग के लिए 800 प्रति कनेक्शन धारक सीधे उनके खाते में जमा किए गए.. जिसके बाद इन हितग्राहियों को पता चला कि उनके नाम से गैस कनेक्शन है तब इस बड़े गड़बड़ झाले की जानकारी हितग्राहियों तक आई, हालांकि इसके बावजूद स्थानीय गैस कनेक्शन वितरकों ने उन्हें गैस कनेक्शन नहीं दिएज्. जबकि सालों पहले इनके नाम पर गैस कनेक्शन इनके नाम से जारी किया जा चुका था और ग्राम पंचायत में इनकी सूची भी चस्पा की गई थी जिसे देखकर यह बार-बार गैस कनेक्शन लेने जाया करते थे। गैस वितरण के एजेंसी मालिकों द्वारा ठगे गए ग्रामीण आज भी तमाम खतरे उठाकर जंगल से लकड़ी लाने को मजबूर है जहां उन्हें जंगली भालूओं का खतरा हमेशा ही बना रहता है साथ ही वनरक्षक भी उन्हें जंगल से लकड़ी लाने से मना करते हैं पर चूल्हा तो जलाना ही है खाना तो बनाना ही हैज् मामले की जानकारी जब जिला कलेक्टर को दी गई तो उन्होंने इस मामले की जांच करा कर शीघ्र ही कार्यवाही करने की बात कहीज्.बहरहाल अब जब पूरे मामले का खुलासा हो गया है तो देखने वाली बात होगी कि मामले में जांच के बाद ऐसे रसुखदार गैस संचालक जो सालो से गरीब हितग्राहियों के हिस्से में डाका डाल रहे थे उनके खिलाफ क्या कार्यवाही करती है।