बिलासपुर । तख़तपुर में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां सांस्कृतिक भवन में बनाया गया टीकाकरण और कोरोना जांच केंद्र का गेट रात 10 बजे खुला पाया गया। जबकि अंदर स्वास्थ्य विभाग की लाखों की दवाएं, कोरोना जांच कीट, पीपीई किट सहित मेडी वेस्ट खुले और असुरक्षित रखे हुए है। यहां कोई भी चौकीदार नही था । इसे स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका एक दूसरे की गलती बता रहे है।
तख़तपुर में स्वास्थ्य विभाग ,टीकाकरण केंद्र और लोगो की सुरक्षा को लेकर गंभीर नही है।रात के 10 बजे टीकाकरण केंद्र का मेंन गेट खुला पाए जाने पर आसपास के लोगो और जनप्रतिनिधियों ने इसकी सूचना मीडिया और पुलिस को दी। थाना प्रभारी मोहन भारद्वाज मौके पर पहुंचे और टीकाकरण केंद्र के गेट खुले होने की जानकारी बीएमओ निखिलेश गुप्ता और मुख्य नगर पालिका शीतल चंद्रवंशी को दी।रात में टीकाकरण केंद्र के मेन गेट के खुले होने की संवेदनशील और गभीर जानकारी मिलने के बाद भी दोनों ने मौके पर आना जरूरी नही समझा और अपने मातहतों को भेज दिया।दरअसल सांस्कृतिक भवन टीकाकरण केंद्र को स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्टोर की तरह भी उपयोग में लाया जा रहा है।यहाँ लाखों की दवाएं और कोरोना से संबंधित मेडिकल किट भी अव्यवस्थित रूप से खुले में पड़े हुए है।
वही नगर पालिका द्वारा 22 जुलाई को पचरैहा नाला में जल स्तर बढऩे से प्रभावित परिवारों को प्रथम तल पर ठहराया गया था।लेकिन दो दिन पहले ही सभी परिवार अपने घर चले गए है ।और आज रात सांस्कृतिक भवन का मेन गेट खुला मिला।मेन गेट के खुले होने से दवाओं और अन्य जरूरी सामानों के चोरी होने की संभावना थी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आये आरएमए की उपथिति में थाना प्रभारी ने निरीक्षण किया तो उन्हें किसी प्रकार के चोरी होने के संकेत नही मिले लेकिन इसकी तस्दीक तो स्वास्थ्य विभाग के अफसर ही कर सकेंगे।वही इस लापरवाही के लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी नगर पालिका की गलती बता रहे हैं।जबकि नगर पालिका के लोग स्वास्थ्य विभाग को दो दिन पहले ही चाबी दे देना बात रहे है।
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की उपस्थिति में जब निरीक्षण किया गया तो स्वास्थ्य विभाग की एक और बड़ी लापरवाही सामने आ गयी।यहाँ कोरोना जांच किट और उसके सैंपल कॉलेक्टिंग बॉटल लापरवाहीपूर्वक खुले में छोड़ दिये गए है।कोरोना जांच के स्वाब ट्यूब को डस्टबिन में हीं छोड़ दिया गया था। इसी तरह टीकाकरण के पश्चात वेस्ट मटेरियल को डस्टबिन में ही छोड़ दिया गया था।इसमे टीकाकरण के लिए उपयोग में लाये गए सिरींज और वायल की बोतलें भी थी।रिकॉर्ड के रजिस्टर और दवाएं भी खुले में ही छोड़ दिये गए थे।जबकि हर दिन के टीकाकरण और कोरोना जांच के बाद सभी मेडिवेस्ट को तत्काल डिस्पोज़ किया जाना चाहिए।लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी कोरोना को खुला आमन्त्रण देते सारे वेस्ट बिना डिस्पोज़ किये खुले में छोड़ गए थे।
सामने और पीछे दोनों तरफ के गेट में नही लगा था ताला
सांस्कृतिक भावन के सामने और पीछे की ओर रसोई के पास गेट बना हुआ है जब थाना प्रभारी द्वारा निरीक्षण किया गया तो सामने के शटर में तो ताला नही लगा था पीछे के गेट में भी ताला नही लगा हुआ था। इसी से समझा जा सकता है कि सांस्कृतिक भवन टीकाकरण केंद्र कितना सुरक्षित है और जिम्मेदार इसके लिए कितने गंभीर है।
बाढ़ प्रभावितों को ठहराया गया था सांस्कृतिक भवन में
एक तरफ सांस्कृतिक भवन का उपयोग कोरोना टीकाकरण और जांच के लिए किया जा रहा है ।तो दूसरी ओर यहां 22 जुलाई को पचरैहा नाले में बढ़े जल स्तर से प्रभावितों परिवारों को संक्रमण के जोखिम में डालते हुए इसके प्रथम तल पर ठहराया गया ।दो दिन पहले संस्कृतिक भवन में ठहरे हुए लोग अपने घर चले गए ।मगर न तो नगर पालिका के कर्मचारियों ने टीकाकरण केंद्र को सुरक्षित करना जरूरी समझा और न ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी ने अपने सामान की सुरक्षा की सुध ली।सबसे बड़ी बात तो यह कि सांस्कृतिक भवन को जब टीकाकरण और कोरोना जांच केंद्र बना दिया गया है तो यहां किसी भी परिवार को ठहराया नही जाना था ।यदि नगर पालिका द्वारा ठहराया गया तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को लोगो और अपने विभाग के सामानों की सुरक्षा सुनिश्चित कर लेना चाहिए था।लेकिन इसके लिए स्वास्थय विभाग की गंभीरता कही दिखी ही नही ।
टीआई मोहन भारद्वाज का कहना हैं कि मुझे रात साढ़े दस बजे सूचना मिली कि तख़तपुर के सांस्कृतिक भवन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाये जा रहै टीकाकरण केन्द्र का दरवाजा खुला है।मौके पर आकर देखा तो सांस्कृतिक भवन का मैन गेट खुला हुआ था इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका के अधिकारियों को दी गयी।स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की उपस्थिति में निरीक्षण किया गया।निरीक्षण में किसी प्रकार का कोई चोरी होना नही लग रहा है।अधिक जानकारी स्वास्थ्य विभाग वाले ही दे सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग से भेजे गए आरएमए शैलेन्द्र शुक्ला ने बताया कि मुझे बीएमओ के द्वारा भेजा गया है।उनका कहना था कि सांसकृतिक भवन जाकर देखिए कि टीकाकरण का गेट खुला है या नही।यहां टीकाकरण होता है और फार्मेसी के सामान रखे हुए हैं। आने पर गेट खुला पाया गया है।इसकी सूचना बीएमओ को दे दी गयी है।
सांस्कृतिक भवन टीकाकरण के मेन गेट को खुला छोड़ देना एक लापरवाही तो है।लेकिन इस तरह जरूरी दवाओं और उपयोगी मेडिकल सामानों और वेस्ट को अव्यवस्थित रूप से फैला हुआ छोड़ देना भी बड़ी लापरवाही है। यह कोरोना को खुला आमंत्रण देने जैसी बात है।