मुंबई । चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के द्वारा कांग्रेस को लेकर दिए बयान पर प्रतिक्रिया देकर शिवसेना के मुखपत्र सामना ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) का नेता कौन होगा, यह तय करने से पहले विपक्ष को भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। शिवसेना का बयान तब आया है, जब प्रशांत किशोर ने यह कहकर कांग्रेस पर निशाना साधा कि उसका नेतृत्व किसी व्यक्ति का दैवीय अधिकार नहीं होता है। उन्होंने कहा था कि पार्टी पिछले 10 वर्षों में 90 प्रतिशत से अधिक चुनाव हार गई है।
संपादकीय में विपक्षी दलों से सत्ता में आने के लिए कांग्रेस के पीछे नहीं जाने का आग्रह किया गया। सामना ने कहा, "कांग्रेस अभी भी कई राज्यों में है। गोवा और पूर्वोत्तर राज्यों में कांग्रेस नेता तृणमूल में शामिल हो गए हैं और आप के साथ भी ऐसा ही है।संपादकीय में कहा गया है, कि यूपीए जैसा गठबंधन बनाने से भाजपा को ही मजबूती मिलेगी। शिवसेना ने भी लखीमपुर खीरी कांड के दौरान प्रियंका गांधी के प्रयासों की सराहना कर कहा, अगर प्रियंका लखीमपुर खीरी नहीं जातीं,तब मामला खारिज हो जाता।प्रियंका ने विपक्षी नेता के रूप में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।सामना में कहा गया है, संप्रग का नेतृत्व करने की दैवीय शक्ति किसके पास है, यह गौण है, पहले हमें लोगों को विकल्प देने की जरूरत है।'
मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार के साथ बैठक के बाद ममता की "कोई यूपीए नहीं है" टिप्पणी, कई विपक्षी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। मुंबई में कार्यक्रम में, टीएमसी प्रमुख ने कहा कि अगर सभी क्षेत्रीय दल एक साथ आते हैं,तब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराना बहुत आसान होगा। इस साल की शुरुआत में हुए बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी की प्रचंड जीत के बाद, ममता लगातार राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत विकल्प की वकालत कर रही हैं, लेकिन परोक्ष रूप से कांग्रेस को टक्कर दे रही हैं। मेघालय में कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा, जब उसके 17 में से 12 विधायक तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। टीएमसी राज्य का मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई।