भोपाल । राजधानी में मेट्रो रेल परियोजना का काम तेजी से हो रहा है। मेट्रो के एलिवेटेड रूट, डिपो के लिए जमीन के बाद अब मेट्रो स्टेशनों का मामला भी सुलझ गया है। मेट्रो के लिए 369 करोड़ रुपए से आठ एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके डिजाइन और निर्माण कार्य के लिए निविदा जारी हो गई है। 25 सितंबर तक इसके आदेश जारी हो सकते है। मेट्रो के डिजाइन और निर्माण के लिए ईआइबी ने यह अनुमानित राशि बताई है। इधर, जिला प्रशासन से मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए जमीन आवंटन करने के प्रस्ताव बनाकर भेज दिए गए हैं। जल्द ही स्टेशन के लिए जमीन भी आवंटित कर दी जाएगी। इधर, मेट्रो के लिए डिपो बनाने के लिए भी काम तेजी से चल रहा है।
मप्र मेट्रो रेल कंपनी ने स्टेशन के लिए निर्माण एजेंसी का चयन करने मार्च में टेंडर जारी किए थे। अधिकारी अक्टूबर में एजेंसी फाइनल होने की बात कह रहे हैं। चयनित कंपनी स्टेशन का डिजाइन भी बनाएगी। ये स्टेशन एम्स, अलकापुरी, हबीबगंज नाका, हबीबगंज, एमपी नगर जोन 1, डीबी मॉल, केंद्रीय विद्यालय और सुभाष नगर में बनेंगे।
यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक से लोन मिला नहीं
भोपाल की डीपीआर में पहले चरण में शामिल दो मेट्रो रूट के निर्माण पर 6941.40 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इसमें से 1164.44 करोड़ केंद्र सरकार और 1843.62 करोड़ रुपए राज्य शासन देगा। यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक (ईआईबी) से 3493.34 करोड़ रुपए का कर्ज लिया जाएगा। बैंक का बोर्ड नवंबर, 2019 में ऋण की मंजूरी दे चुका है। यह अब तक नहीं मिला है। इसके बावजूद कॉपोरेशन की ओर से स्टेशन निर्माण के लिए जारी टेंडर में ईआईबी को ही अनुदान एजेंसी बताया गया है। वहीं राज्य सरकार ने भी भोपाल और इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बजट में 262 करोड़ रुपए रखा है। यह राशि स्टेशन निर्माण  के लिए नाकाफी है।
अंडरग्राउंड हाईटेंशन लाइन में खर्च होंगे 39.57 करोड़
मेट्रो का डिपो में काम तेजी से चल सके, इसके लिए बिजली कंपनी से 132 केवी की हाईटेंशन लाइन बिछाई जाएगी। मप्र की मेट्रो रेल परियोजना के प्रथम चरण के अंतर्गत भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के लिए मेट्रो रेल डिपो की पॉवर कनेक्टिविटी के लिए 39.57 करोड़ रुपये की लागत से जमीन के अंदर से खोदकर डिपो तक पहुंचाया जाएगा। चंबल से मेट्रो रेलवे सर्विस स्टेशन सुभाष नगर तक अंडरग्राउंड ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण किया जाएगा। बताया जा रहा है कि डिपो में इतनी बिजली लगेगी, जिससे करीब दो लाख घर रोशन हो सकते है।
प्रतिमाह खपेगी चार-पांच करोड़ रुपये की बिजली
बिजली कंपनी के मुताबिक शुरुआती दौर में मेट्रो सिर्फ 7-8 किलोमीटर लंबे रूट पर भी सफर तय करती हो तो भी प्रतिमाह चार से पांच करोड़ रुपये की बिजली की खपत होगी। यानी भोपाल मेट्रो शुरुआत से ही सालाना करीब 50 करोड़ रुपये की बिजली पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से खरीदेगी। बिजली की यह खपत और राजस्व का आंकड़ा एक छोटे जोन के बराबर है।
कई चुनौतियां बाकी
मेट्रो के ट्रैक पर आने और दौडऩे के बीच कई चुनौतियां हैं। इनको दूर करने में जिम्मेदार जुटे हैं। पुराने भोपाल में करीब 2 किमी के अंडरग्राउंड रूट को लेकर फिलहाल कोई तैयारी नहीं है। कुछ जगह जमीन अधिग्रहण का मामला अटका है, तो जमीन को लेकर कोर्ट में भी मामले हैं। हालांकि, कई मामलों को सुलझाने में जनप्रतिनिधि से लेकर अफसर तक लगे हैं। हाल ही में नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बैठक लेकर मेट्रो में आ रही अड़चनों को दूर करने के निर्देश दिए थे।