भोपाल : राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने सभी शिक्षकों, शिष्यों, चिंतकों, शोधकर्ताओं का आह्वान किया है कि हमारी जनता, हमारे कौशल, हमारी मूल क्षमताओं को पहचान कर उनके सर्वश्रेष्ठ उपयोग की संभावनाओं पर विचार करें, हर संकट अपने साथ एक अवसर लाता है। कोविड-19 भी अपवाद नहीं है। अब किस तरह के नए अवसर विकास के क्षेत्र उभर सकते हैं, उनकी तलाश की जाए। उन्होंने कहा कि कोविड-पश्चात विश्व के अनुसरण के बजाए, हमें भारत को मौजूदा परिपाटियों से आगे बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए।

राज्यपाल आज वर्तमान परिस्थितियों में शिक्षण संस्थाओं की भूमिका विषय पर ई-संगोष्ठी को राजभवन से संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का आयोजन शिक्षा, संस्कृति उत्थान न्यास और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के संयुक्त तत्त्वाधान में किया गया था।

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि वर्तमान परिस्थतियों में शिक्षा व्यवस्था पर कोविड के प्रभावों का नकारात्मक असर कम से कम हो, इस पर व्यापक चिंतन होना चाहिए। कोविड व्यवहार का कड़ाई से पालन करते हुए, ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था के लिए डिजिटल रुप में विषय सामग्री, ई-पुस्तकों आदि की उपलब्धता को विस्तारित किया जाए। शिक्षा को वंचित वर्गों, क्षेत्रों में पहुँचाने का माध्यम ऑनलाइन शिक्षण को बनाने के प्रयास किए जाए। तकनीक को यूजर फ्रेडंली बनाने पर भी फोकस किया जाना चाहिए। उपलब्ध तकनीक को निरन्तर अद्यतन करने के साथ ही शोध और अनुसंधान के प्रयास आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा को व्यक्ति मूलक बनाने में आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस के द्वारा प्रत्येक छात्र-छात्रा की विशेषताओं, कमजोरियों और रुचियों के हिसाब से शिक्षण द्वारा शिक्षा को विद्यार्थी परक बनाने के प्रयासों पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम के ऐसे विषय जिनमें हुनर अथवा प्रैक्टिकल की जरुरत नहीं है। उन सभी विषयों और क्षेत्रों में ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था को मजबूती दी जाए। विषय जिनमें क्षमता आधारित हुनर चाहिए उन्हें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से शिक्षण के लिए चिन्हित कर शिक्षण कार्य किया जाना चाहिए। इससे दूरस्थ अंचल में रहने वाले छात्र-छात्राओं के शिक्षण में भी गुणात्मक परिवर्तन किया जाना संभव होगा। उन्होंने ऑनलाइन शिक्षा को आऊटकम आधारित बनाने और सर्टिफिकेशन के ऐसे ऑनलाइन प्लेटफार्म बनाने के लिए कहा, जिनके जरिए छात्र-छात्रा लर्निंग स्किल को बढ़ा सके।

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऐसा हो सकता हैं कि महामारी के कारण कुछ छात्र-छात्राएँ आर्थिक या पारिवारिक चुनौतियों का सामना कर रहे हो। ऐसे छात्रों के लिए विद्यालयों को अधिक संवेदनशील होकर कार्य-योजना तैयार करनी चाहिए। प्रयास होना चाहिए कि आर्थिक संकट के कारण कोई भी छात्र शिक्षा प्राप्त करने से वंचित नहीं हो। उन्होंने कहा कि कोरोना से सम्पूर्ण समाज प्रभावित हुआ है। जरुरत है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए नई जीवन शैली जिसमे योग और परम्परागत चिकित्सा पद्धतियों को शामिल करते हुए अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि हमें समझना होगा कि कोरोना को साथ में लेकर ही जीना होगा। अपने स्वास्थ्य के लिए हम स्वयं जिम्मेदार है। इस भावना के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को सुरक्षित बनाने के प्रयास करने होगें। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजक शिक्षा, संस्कृति, उत्थान न्यास, नई दिल्ली द्वारा विभिन्न विषयों और आयामों के साथ किए जा रहें कार्यों के लिए न्यास के कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनके प्रयास देश के उज्जवल भविष्य का भरोसा दिलाते है। श्री पटेल ने संगोष्ठी में कोविड के दौरान दिवगंत आत्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि दी। सभी कोरोना वारियर्स की सेवाओं का स्मरण करते हुए उनका अभिनंदन किया। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं के स्टॉफ, विद्यार्थियों जिन्होंने सामाजिक दायित्व को समझ कर जनता की सेवा के कार्य किए है। उनके व्यक्तिगत, संस्थागत प्रयासों की सराहना भी की।

उच्चशिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय मनोभावों के अनुसार बनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार भारतीय संस्कृति और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश निरंतर आगे बढ़ रहा है। टॉस्क फोर्स गठित कर पाठ्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण संबंधी विभिन्न आयामों के सफल क्रियान्वयन पर तेज गति से कार्य हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के गाँवों को गोद लेने का भी एक व्यापक कार्यक्रम तैयार किया गया है।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव एवं कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री अतुल कोठारी ने कहा कि शिक्षा बदलती है तो देश बदलता है। कोविड महामारी के दौरान शिक्षण संस्थाओं ने समाज के दु:ख दर्द में सहभागी हो कर, समाज को दिशा देने की भूमिका निभाई है। न्यास से जुड़े विद्यालयों के शिक्षकों ने दूरस्थ अंचलों जनजातीय क्षेत्रों में जाकर शिक्षण, प्रशिक्षण के कार्य कर, सामाजिक प्रतिबद्धता दिखाई है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थाओं को ऐसे ही प्रयास आत्म-निर्भर भारत निर्माण के संकल्प को सफल बनाने के लिए करने होगें। जरुरत शिक्षण संस्थाओं में आत्म-निर्भरता का वातावरण देने की है। उन्होंने बताया कि शारदा समूह ने झाबुआ को आत्म-निर्भर बनाने का संकल्प लेकर इस दिशा में पहल की है।

संगोष्ठी में शारदा समूह झाबुआ और स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय सागर ने शिक्षण संस्थाओं द्वारा कोविड काल में सामाजिक सरोकारों के कार्यों का प्रस्तुतिकरण किया। इस अवसर पर श्री अशोक कड़ले ने शिक्षा, संस्कृत, उत्थान न्यास की गतिविधियों की जानकारी दी। स्वागत उद्बोधन देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कुलपति श्रीमती रेणु जैन ने दिया। अतिथियों का परिचय शिक्षा, संस्कृत, उत्थान न्यास के श्री धीरेन्द्र भदौरिया ने दिया। आभार प्रदर्शन कुलसचिव देवी अहिल्या विश्वविद्यालय डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने किया।