नई दिल्ली । देश में सबसे पुराना दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) उपलब्ध बेड्स की संख्या के मुकाबले अस्पताल में जरूरतमंद रोगियों की अधिक संख्या होने के चलते मांग और आपूर्ति में असंतुलन की समस्या से जूझ रहा है। लोकसभा में दिलेश्वर कामत और युगल किशोर शर्मा के प्रश्न के लिखित उत्तर में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने यह जानकारी दी। मंडाविया ने कहा कि विभिन्न गंभीर रोगों के इलाज के लिए प्रतीक्षा अवधि को कम करने के उद्देश्य से मातृ एवं शिशु ब्लॉक, वृद्धावस्था हेतु राष्ट्रीय केंद्र, सर्जिकल ब्लॉक तथा भुगतान वाले निजी ब्लॉक आदि स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्लीनिकल विभागों द्वारा अस्पताल में जरूरतमंद रोगियों से संबंधित प्रतीक्षा सूची को उनकी रोग की दशा, अपेक्षित इलाज की तात्कालिकता और बेड्स की उपलब्धता के अनुसार तैयार किया जाता है। मंत्री ने कहा कि जहां तक ओपीडी का संबंध है, यह संबंधित विभाग की अधिकतम कार्य क्षमता के अनुसार तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि नए रोगियों के लिए 80 प्रतिशत ओपीडी नामांकन अधिकतम 30 दिन पहले ऑनलाइन किए जाते हैं तथा शेष 20 प्रतिशत नामांकन रोगियों द्वारा स्वयं जाकर कराए जाते हैं। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि 28 प्रयोगशालाओं के समूह 'इंसाकोग द्वारा किए गए जीनोम सिक्वेंसिंग में कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट वाले 70 मामलों का पता चला है। उन्होंने लोकसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब तक सार्स-सीओवी-2 के 58,240 नमूनों का जीनोम सीक्वेंसिंग किया गया है और इनमें से 46,124 का विश्लेषण किया गया। उन्होंने बताया कि ज्यादातर नमूनों में कोविड के डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई। भारत में कोरोना की दूसरी लहर के पीछे डेल्टा वैरिएंट ही था। इस लहर से लाखों लोग संक्रमित हुए और हजारों लोगों की जान चली गई। मंत्री के अनुसार, 70 मामले डेल्टा प्लस वैरिएंट वाले पाए। इसके अलावा, 4,172 मामले अल्फा, 217 मामले बीटा और एक मामला गामा स्वरूप का पाया गया।