Sunday, 17 December 2017, 1:29 PM

जीवन मंत्र

यह एक आनंदोत्सव है

Updated on 6 August, 2015, 7:43
 वैराग्य जीव को तब होता है जब परमात्मा उस पर अनंत कृपा करते हैं। इस मानव जीवन में यदि कही भय नहीं है तो वह है केवल वैराग्य में और त्याग में, समर्पण में। बाकी तो कदम-दर-कदम भय ही भय है और जहां भय है वहां जीवन यात्र निर्विध्न पूरी... आगे पढ़े

हार के साथ करें जीत की तैयारी

Updated on 5 August, 2015, 7:34
जब व्यक्ति किसी नौकरी के लिए आवेदन करता है तो सामान्यत: वह अपनी योग्यताओं को दिखाने का प्रयास करता है। अक्सर नियोक्ताओं के पास ऐसे ही रिज्यूम बहुतायत में पहुंचते हैं जिनमें उम्मीदवारों ने अपनी खूबियों का बखान किया होता है। इन्हें पढ़कर वे यही सोचते हैं कि इस तरह... आगे पढ़े

शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं

Updated on 4 August, 2015, 11:51
शब्दों के माध्यम से व्यक्ति को किसी भी भाव व रिश्ते का अहसास होता है। शब्दों के द्वारा ही व्यक्ति अपने विचारों का आदान-प्रदान करता है। शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। वे व्यक्ति के विचारों को प्रभावित करते हैं। सही मायनों में शब्द हमारे विचारों की मुद्रा होते हैं। शब्दों... आगे पढ़े

रिमझिम बरसती बारिश की बूंदें! कितना सुकून देती हैं मन को

Updated on 30 July, 2015, 13:10
पहली बारिश और तुम्हारी याद ना आएं ये कैसे हो सकता है, बारिश का इंतजार वैसे तो सबको होता है पर सबसे ज्यादा उसे होता है जिसे बारिश, बारिश का मौसम पंसद हो और, हां सच्चे दिल से किसी से प्यार हो। बारिश में भीगना फुहारों के साथ मस्ती करना... आगे पढ़े

ऐसी होती है आत्मा

Updated on 28 July, 2015, 7:22
संस्कृत शब्द 'आत्मा' का अनुवाद अक्सर अंग्रेजी में 'सोल' या फिर 'स्पिरिट' के रूप में किया जाता है। मगर इन तीनों शब्दों की जड़ें अलग-अलग हैं और अर्थ भी। 'स्पिरिट' ग्रीक मूल का है, 'सोल' ईसाई मूल का और 'आत्मा' हिंदू मूल का। ग्रीस में लोग मानते थे कि जब कोई... आगे पढ़े

दान देने का संबंध स्वयं से है किसी और से नहीं

Updated on 26 July, 2015, 12:07
अगर आप कुछ दान करते हैं तो वह आपके उत्कर्ष से जुड़ा है। देते हुए दूसरे की स्थिति के बारे में ज्यादा आकलन ठीक नहीं है। दान देने का संबंध सिर्फ आपकी भावनाओं से है। अगर मन कहता है कि आपको कुछ देना चाहिए तो दीजिए और अगर मन नहीं... आगे पढ़े

करें रिश्तों की साफ-सफाई

Updated on 21 July, 2015, 14:02
अगर झाड़-पोंछ न की जाए तो घर के कोने-कोने में धूल जम जाती है। ठीक इसी तरह हमारे रिश्ते-नातों पर अनजाने में सिलवटें पड़ जाती हैं। वक्त के साथ उन पर धूल की परतें भी जम जाती हैं। वजह कुछ भी हो सकती है। समय-समय पर यदि हम अपने रिश्तों... आगे पढ़े

प्रार्थना से करें अंतस मन की पवित्रता

Updated on 19 July, 2015, 8:59
प्रार्थना करना लिखे हुए कुछ शब्दों को दोहराना भर नहीं है। प्रार्थना का अर्थ होता है परमात्मा का मनन और उसका अनुभव। प्लेटो ने कहा था,'आत्मा का खुद से बातचीत करना ही मनन कहलाता है।' जब हम आत्मा अर्थात अपने भीतर अवस्थित आत्म-तत्व से बातचीत करते हैं, तो वह प्रार्थना है... आगे पढ़े

ये होते हैं स्वार्थ और परमार्थ के रंग

Updated on 18 July, 2015, 13:15
जो परमार्थ दिखावे के लिए होता है, वह स्वार्थ से भी बुरा है और जो स्वार्थ सबके हित में हो, वह परमार्थ से भी अच्छा है। परमार्थ को हम जितनी ऊंचाइयों के साथ देखते हैं, स्वार्थ को उतनी ही हेय दृष्टि से देखा जाता है। लेकिन मेरा मानना है कि... आगे पढ़े

नहीं दरकेंगे रिश्ते

Updated on 16 July, 2015, 13:25
शादी के बाद डेटिंग करें तो मिलेगा क्वालिटी टाइम। कभी लांग ड्राइव पर निकल जाएं तो कभी फिल्म देख आएं। कभी दस मिनट रुककर आइसक्रीम खा लें तो गुजार सकते हैं बेहतरीन पल। हाल ही में आया एक सर्वे बताता है कि क्वालिटी टाइम की कमी से रिश्ते दरक रहे... आगे पढ़े

जीवन में समता यानी संतुलन बहुत जरूरी है

Updated on 14 July, 2015, 13:13
जीवन में समता यानी संतुलन बहुत जरूरी है, लेकिन अधिकांश लोगों का जीवन असंतुलित बना हुआ है। हमने एक ऐसी मानसिक स्थिति का निर्माण कर रखा है कि सुख की स्थिति आने पर हम खुशी से उछल जाते हैं और दुख की स्थिति में मानो मुरझा जाते हैं जबकि हमें... आगे पढ़े

यह है हमारे दुखी रहने का कारण, इससे ऐसे बचें

Updated on 14 July, 2015, 7:23
हम अपेक्षा के सागर में डूबते-उतराते रहते हैं, यही हमारे दुखी रहने का कारण है। यदि हम दूसरों से अपेक्षाएं न लगाकर, दूसरों को बदलने के बजाय खुद को बदलें, तभी हम अपेक्षाओं के सागर के पार उतर सकेंगे। एक अरसे बाद मुलाकात में एक मित्र बातों ही बातों में पते... आगे पढ़े

भूत सिद्धि – शरीर को शून्य में विलीन करना

Updated on 11 July, 2015, 16:38
अगर किसी को पांच तत्वों पर सिद्धि प्राप्त हो, तो शरीर का त्याग करके उसे शून्य में विलीन किया जा सकता है। फिर शरीर का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता। बहुत से योगियों ने ऐसा किया है। तमिलनाडु में वल्लालर रामालिंगा आदिगालार नाम के एक योगी थे। एक दिन, वे एक... आगे पढ़े

एकत्व-बोध की ऊर्जा

Updated on 11 July, 2015, 13:07
भेदभाव करने वाले अक्सर दुखी और निराश दिखाई देते हैं, जबकि समानता का व्यवहार करने वाले हमेशा प्रसन्न और ऊर्जावान। भारतीय दर्शन सभी जीवों में एकत्व की बात कहकर लोगों को अपनी ऊर्जा का सही उपयोग करने की सलाह देता है... एक सांप परिवार के साथ बिल में रहता था। इसी... आगे पढ़े

मनुष्य को दूसरे से ईष्या नहीं रखना चाहिए जो ऐसा करता है वह सुखी नहीं रहता

Updated on 11 July, 2015, 13:01
इटारसी। श्री द्वारिकाधीश बड़ा मंदिर में इस समय पुरूषोतम मास की आखरी और चौथी कथा शिवपुराण की चल रही है। कथा व्यास आचार्य नरेन्द्र शास्त्री को सुनने सैकड़ो श्रद्घालु आ रहे है। श्रीमती शांतिदेवी पगारे एवं श्री महादेव पगारे की स्मृति में शिव पुराण का आयोजन किया गया है। कथा... आगे पढ़े

जीवन में जागृति नितांत आवश्यक है

Updated on 9 July, 2015, 12:04
जीवन में जागृति नितांत आवश्यक है। जीव की परमगति में जागृति का विशेष महत्व है। हम कई बार सोते और जागते हैं, परंतु ध्यान देने योग्य बात यह है कि समय कभी नहीं सोता। अगर समय सो गया, तो हम और आप सब हमेशा के लिए सो जाएंगे। सोये रहने... आगे पढ़े

हम जो देते हैं वही हमारा गुण बन जाता है

Updated on 9 July, 2015, 7:27
पानी, हवा, अंतरिक्ष और पूरा जगत ही रंगहीन है। यहां तक कि जिन चीजों को आप देखते हैं, वे भी रंगहीन हैं। रंग केवल प्रकाश में होता है। आप जो भी रंग चाहते हैं, वे सभी सिर्फ प्रकाश में है। अगर प्रकाश किसी वस्तु पर पड़ता है और वह वस्तु कुछ... आगे पढ़े

दादी से दोस्ती

Updated on 8 July, 2015, 13:29
मम्मी-पापा के पास तो बच्चों के लिए टाइम है नहीं। ऐसे में बच्चों से दिल की बात कौन पूछे? दादी मां ने इस मुश्किल का हल निकाल लिया है। वे बन गई हैं उनकी हमजोली। स्कूल के किस्से ही शेयर नहीं करतीं, पिज्जा-बर्गर में भी बराबर का साथ देती हैं।... आगे पढ़े

जीवन-ऊर्जा का संरक्षण

Updated on 6 July, 2015, 13:02
अधिकांश लोग जीवन में सब कुछ अपने मन के अनुसार करने के लिए अपनी बहुमूल्य ऊर्जा को नष्ट करते रहते हैं। जब ऐसा नहीं हो पाता तो मन व शरीर पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है, हावभाव बदल जाते हैं, ऐसे में तनाव होना निश्चित है। विपरीत असर को झेलने... आगे पढ़े

साधना की झाडू से दूर करें मन की चंचलता

Updated on 4 July, 2015, 9:23
मन के सदनुष्ठान बड़े कठिन हैं, क्योंकि मन अति चंचल है। मन प्राय:विक्षुब्ध सागर जैसा बना रहता है। विचारों की तरंगों पर तरंगों उठती रहती हैं। एक विचार पूरा न हो इतने में दूसरे अनेक विचार उठ खड़े होते हैं। जिन विचारों को स्थाई रूप देना चाहते हैं, वे गायब... आगे पढ़े

मन की शुचिता को इस तरह बनाएं सौभाग्यशाली

Updated on 4 July, 2015, 9:23
दुःख से हम सब डरते हैं, यह जानते हुए भी सुख-दुख दोनों ही जीवन के अनिवार्य पहलू हैं और दोनों अस्थाई हैं। अध्यात्म की मान्यता है कि आत्मा ही परम आनंद है और दुख हमें आत्मा के निकट ले जाता है। केवल एक बात याद रखो कि तुम कितने सौभाग्यशाली हो।... आगे पढ़े

सफल जीवन के मूलमंत्र

Updated on 3 July, 2015, 13:50
यह तो आपने भी सुना होगा कि परिश्रम और धैर्य से ही सफलता मिलती है, लेकिन आपका ध्यान अपने लक्ष्य पर बराबर रहना चाहिए। फिर सफलता को कोई आपसे दूर नहीं कर सकता - किसी भी कार्य को करते हुए असुरक्षा या नकारात्मक भाव मन में न लाएं। आप जब कार्य... आगे पढ़े

30 टिप्स फिजूलखर्ची से बचने के

Updated on 30 June, 2015, 12:02
बचत..! काफी मुश्किल काम है इस दौर में यह। लेकिन एक कहावत यह भी है कि बूंद-बूंद से घड़ा भरता है। थोड़ी सी मेहनत, योजना और बुद्धिमत्त से इस बूंद-बूंद को बचाया जा सकता है। राशन, बिजली, गैजेट्स, कपड़ों, पेट्रोल या फोन बिल्स में थोड़ी कटौती संभव है। जानिए कैसे..! राशन... आगे पढ़े

स्मार्ट महिला.. स्मार्ट खाता

Updated on 29 June, 2015, 12:12
डिजिटल दुनिया की जरूरत है कि स्मार्टली मैनेज हो आपकी बैंक डिपॉजिट। जानें कि कैसे एटीएम के इस्तेमाल से लेकर मोबाइल एलर्ट तक अब आपके साथ चौबीसों घंटे है ताकत अपने पैसे तक पहुंच और इस पर नियंत्रण की.. दिनभर की भागमभाग वाली जिंदगी में लगी स्मार्ट महिलाओं को चाहिए एक... आगे पढ़े

भीतर की संपदा

Updated on 28 June, 2015, 11:14
बाहरी धन-संपदा से ज्यादा महत्वपूर्ण है भीतर की संपदा। अंतस के धनी बनकर ही हम सही मायने में सफल कहलाएंगे... कणाद ऋषि के बारे में किंवदंती है कि खेतों में जो अन्न कण पड़े रह जाते थे, उससे अपना पेट भरते थे, इसीलिए उनका नाम कणाद पड़ा। एक कथा है कि... आगे पढ़े

ध्यान से हो मन का मैनेजमेंट

Updated on 27 June, 2015, 10:25
नींद की तरह ध्यान से भी हमें जैव-रासायनिक संतुलन प्राप्त होता है, जिससे हम भीतर-बाहर के सारे युद्धों में विजयी होने की क्षमता रखते हैं। ध्यान हमें मन को शांत तथा मौन रखते हुए सफलता का शिखर छूने में मदद करता है।   मौन के बिना सफलता वैसी ही है, जैसे गंध... आगे पढ़े

सच बोलो पर मीठा भी बोलो

Updated on 27 June, 2015, 10:25
कभी-कभी व्यक्ति अपने चरित्र से, चिंतन से, स्वभाव से, व्यक्तित्व से, आचरण से, उपस्थिति से बहुत कुछ बोलता है। कहीं-कहीं ग्रंथों से संकेत दिए हैं कि व्यक्ति को बोलने की आवश्यकता नहीं है। बोलना तो व्यर्थ है।   महापुरुष मौन से ही संकेत दे देते हैं। उनका तो आचरण और उपस्थिति ही... आगे पढ़े

योग आनंद मानव कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक है

Updated on 27 June, 2015, 10:08
योग आनंद का ऐसा स्नोत है जो मानव कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक है। योग से आनंद और सुख की प्राप्ति होती है और योगी का आचार-विचार परिष्कृत हो जाता है। भारतीय योग को जब विदेशों में 'योगा' नाम से प्रसिद्धि मिली, तब जन-मानस इसकी ओर कहीं ज्यादा आकृष्ट होने... आगे पढ़े

प्रकृति और मनुष्य का अंतर संबंध

Updated on 26 June, 2015, 10:30
अपने आसपास प्रकृति कितने रूपों में खिलती और इठलाती है। यहां ही जीवन की प्रेरणा छुपी है। जीवन का रस छुपा है और जीवन के लिए संदेश भी। प्रकृति में बहुत कुछ निहित है।   मैं विश्वास करता हूं कि एक छोटे-से फूल के सौंदर्य में जो शक्ति छुपी हुई है, वह... आगे पढ़े

समस्याओं को समझें मिलेगी शांति

Updated on 26 June, 2015, 10:29
आम आदमी ज्यादातर अपनी तात्कालिक समस्याओं जैसे अभाव, बेरोजगारी, बीमारी, द्वंद आदि में ही घिरा रहता है। तो जीवन के गहरे मुद्दों की ओर वह कैसे ध्यान दे सकता है? लेकिन इसका जवाब ढूढें तो पाएंगे कि हम तत्काल के प्रति ज्यादा चिंतित रहते हैं दूर के प्रति हमारी दृष्टि... आगे पढ़े

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