Friday, 24 March 2017, 3:44 PM

जीवन मंत्र

भीतर की संपदा

Updated on 28 June, 2015, 11:14
बाहरी धन-संपदा से ज्यादा महत्वपूर्ण है भीतर की संपदा। अंतस के धनी बनकर ही हम सही मायने में सफल कहलाएंगे... कणाद ऋषि के बारे में किंवदंती है कि खेतों में जो अन्न कण पड़े रह जाते थे, उससे अपना पेट भरते थे, इसीलिए उनका नाम कणाद पड़ा। एक कथा है कि... आगे पढ़े

ध्यान से हो मन का मैनेजमेंट

Updated on 27 June, 2015, 10:25
नींद की तरह ध्यान से भी हमें जैव-रासायनिक संतुलन प्राप्त होता है, जिससे हम भीतर-बाहर के सारे युद्धों में विजयी होने की क्षमता रखते हैं। ध्यान हमें मन को शांत तथा मौन रखते हुए सफलता का शिखर छूने में मदद करता है।   मौन के बिना सफलता वैसी ही है, जैसे गंध... आगे पढ़े

सच बोलो पर मीठा भी बोलो

Updated on 27 June, 2015, 10:25
कभी-कभी व्यक्ति अपने चरित्र से, चिंतन से, स्वभाव से, व्यक्तित्व से, आचरण से, उपस्थिति से बहुत कुछ बोलता है। कहीं-कहीं ग्रंथों से संकेत दिए हैं कि व्यक्ति को बोलने की आवश्यकता नहीं है। बोलना तो व्यर्थ है।   महापुरुष मौन से ही संकेत दे देते हैं। उनका तो आचरण और उपस्थिति ही... आगे पढ़े

योग आनंद मानव कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक है

Updated on 27 June, 2015, 10:08
योग आनंद का ऐसा स्नोत है जो मानव कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक है। योग से आनंद और सुख की प्राप्ति होती है और योगी का आचार-विचार परिष्कृत हो जाता है। भारतीय योग को जब विदेशों में 'योगा' नाम से प्रसिद्धि मिली, तब जन-मानस इसकी ओर कहीं ज्यादा आकृष्ट होने... आगे पढ़े

प्रकृति और मनुष्य का अंतर संबंध

Updated on 26 June, 2015, 10:30
अपने आसपास प्रकृति कितने रूपों में खिलती और इठलाती है। यहां ही जीवन की प्रेरणा छुपी है। जीवन का रस छुपा है और जीवन के लिए संदेश भी। प्रकृति में बहुत कुछ निहित है।   मैं विश्वास करता हूं कि एक छोटे-से फूल के सौंदर्य में जो शक्ति छुपी हुई है, वह... आगे पढ़े

समस्याओं को समझें मिलेगी शांति

Updated on 26 June, 2015, 10:29
आम आदमी ज्यादातर अपनी तात्कालिक समस्याओं जैसे अभाव, बेरोजगारी, बीमारी, द्वंद आदि में ही घिरा रहता है। तो जीवन के गहरे मुद्दों की ओर वह कैसे ध्यान दे सकता है? लेकिन इसका जवाब ढूढें तो पाएंगे कि हम तत्काल के प्रति ज्यादा चिंतित रहते हैं दूर के प्रति हमारी दृष्टि... आगे पढ़े

जो आप नहीं हैं उसका दिखावा क्यों

Updated on 25 June, 2015, 10:38
अगर आप दिखावे के फेर में पड़ते हैं तो अपनी स्वाभाविकता को खोते हैं अपनी पहचान को खोते हैं और बदले में पाते कुछ भी नहीं। दूसरों की तरह दिखने का विचार हमारा बहुत नुकसान करता है। हर किसी के व्यक्तित्व में बहुत सारी खूबियां और कमियां होती हैं।   अपनी अच्छाइयों... आगे पढ़े

अनुभवों से भरा हमारा जीवन

Updated on 25 June, 2015, 10:37
मैं मानता हूं कि जीवन आवश्यक रूप से सुख और दु:ख, आनंद और कष्ट, सफलता और असफलता तथा प्रकाश और छाया का मिला-जुला रूप है और जब तक हम इनका अतिक्रमण करने की क्षमता नहीं प्राप्त कर पाते, हमें इनको अपनी अध्यात्मिक प्रगति,आवश्यक पड़ाव ही मानना चाहिए।   और यह कि प्रत्येक... आगे पढ़े

चालबाजियों में नहीं है जीवन का सुख

Updated on 24 June, 2015, 10:27
अगर हम खुद को श्रेष्ठ और बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं तो हमारे दिमाग में कई तरह की चालबाजियां आने पर भी हम उनमें भाग नहीं लेते। हम ईमानदारी से जीवन जीते हैं। चालाकियों के साथ हम दूसरों को प्रभावित तो कर सकते हैं लेकिन ये हमें... आगे पढ़े

जानिए समृद्धि का सूत्र

Updated on 24 June, 2015, 10:26
जीवन विचारों का प्रतिफलन है। यह 'जैसा बोया वैसा पाया' के सिद्धांत पर चलता है। विचार ही हमारे मित्र हैं और वही शत्रु भी। इसलिए विचारों को परखिए। चिंतन-मनन कीजिए। उसके बाद सिर्फ उन्हीं विचारों को ग्रहण कीजिए, जो उपयुक्त हों।   एक बात अक्सर कही जाती है कि 'खर्चे कम करो।'... आगे पढ़े

प्रकृति के हर कण में होती है खुशी

Updated on 23 June, 2015, 9:38
जीवन परमात्मा का प्रसाद होता है। इसे यों भी कह सकते हैं कि जीवन पूर्ण परमात्मा की आंशिक अभिव्यक्ति है। इसलिए हम मानते हैं कि हमारे अंतर्मन में परमात्मा निवास करता है। परमात्मा प्राणरूप में हमारे सूक्ष्म और स्थूल शरीर का संचालन करता है। इसलिए जीवात्मा को परमात्मा भी कहते... आगे पढ़े

भय से भागें नहीं सामना करें कुछ इस तरह

Updated on 22 June, 2015, 18:54
जब हम अपने भय से नजरें चुराते हैं, तो वह हमें और भी डराता है। भय पर विजय पाने के लिए हमें उसकी आंखों में आंखे डालकर देखना होगा। तभी हम दुनिया की खूबसूरती का पूर्णता के साथ अहसास कर सकते हैं।   अधिकतर लोगों का जीवन सुखद और दुखद घटनाओं से... आगे पढ़े

शांति को बाहर नहीं अंदर महसूस करें

Updated on 19 June, 2015, 9:37
 क्या आप जानते हैं कि मनुष्य किस चीज का बना हुआ है? मनुष्य 6 चीजों से बना है- ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, कार्बन, कैल्शियम, फॉस्फोरस और नाइट्रोजन! चाहे वह अमेरिकन हो, ऑस्ट्रेलियन या अफ्रीकन हो! सत्तर प्रतिशत आप पानी हैं। पानी से आपको क्या दुश्मनी है? आप दूसरे मनुष्य से दुश्मनी क्यों... आगे पढ़े

सकारात्मक शक्ति के पीछे छिपे रहस्य का अनछुआ राज

Updated on 17 June, 2015, 12:13
सकारात्मक सोच रखने वाले अच्छे माता-पिता, अच्छे पति-पत्नी और अच्छे अधिकारी साबित होते हैं, जबकि नकारात्मक लोगों की पूरी ऊर्जा लोगों को गलत साबित करने में ही व्यय होती है। हम चाहें, तो अपने व्यक्तित्व को सकारात्मकता की ओर मोड़ सकते हैं। हमारा मन एक कंप्यूटर की तरह काम करता है... आगे पढ़े

लेखक बनने का मूलमंत्र

Updated on 14 June, 2015, 13:35
एक प्रसिद्ध लेखक के सम्मान में एक कॉलेज के छात्रों ने भोज का आयोजन किया। उस भोज में नगर के विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। छात्रों का इतना भव्य आयोजन देखकर लेखक बहुत खुश हुए। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने कहा कि, 'इस कॉलेज के छात्र बहुत उत्साही हैं।... आगे पढ़े

प्रतिकार से शांति की ओर..

Updated on 14 June, 2015, 10:22
भले ही सर्वोच्च आदर्श अप्रतिकार हो, किंतु यदि हम प्रतिकार नहीं कर सकते, तो उस तक नहीं पहुंच सकते... जब हम ‘अप्रतिकार’ की बात करते हैं, तब हमें यह ध्यानपूर्वक सोच लेना चाहिए कि हममें प्रतिकार की शक्ति है भी या नहीं। शक्तिशाली होते हुए भी यदि हम प्रतिकार न करें,... आगे पढ़े

महकता रहे जीवन

Updated on 14 June, 2015, 10:20
वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए पति-पत्नी दोनों को थोड़ा सा धीरज रखना होगा और समझदारी से काम लेना होगा... स्थायित्व की धारणा लंबा जीवन साथ गुजार रहे दंपतियों का कहना है कि उन्होंने यह कभी अपेक्षा नहीं की कि उनकी जिंदगी हमेशा खुशनुमा बनी रहे, लेकिन यह अपेक्षा जरूर की... आगे पढ़े

समस्याओं में छिपा है समाधान खोज कर तो देखिए

Updated on 12 June, 2015, 12:06
एक युवक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत था। वह अपनी जिंदगी से खुश नहीं था। वो हर समस्या से परेशान था और उसी के बारे में सोचता रहता था। एक बार शहर से कुछ दूरी पर महात्मा का काफिला रुका। जब उस युवक को पता चला तो वह भी दर्शन के... आगे पढ़े

आशा हमारे विश्वास का संबल है

Updated on 8 June, 2015, 12:20
आशावादी बनें, सफल जीवन का संपूर्ण आयाम आशा की उर्वर भूमि पर ही खड़ा होता है। आशा हमारे विश्वास का संबल है। हमारा जीवन स्वयं आशा का प्रतिबिंब है। अपने गुणों पर विश्वास से ही आशा बनी रहती है। आशावादियों के जीवन की कोशिकाएं क्रियात्मक बनी रहती हैं। वस्तुत: कर्म... आगे पढ़े

प्रेम की खूशबू ही उसका सही परिचय

Updated on 8 June, 2015, 9:21
कहते हैं कि 'जब अन्य चीजों को सीखने के प्रयास खत्म हो जाते हैं वहीं प्रेम प्रकट होता है। आप तभी प्रेम कर सकते हैं जबकि आप आधिपत्य की कोशिश नहीं करते हैं।' जब आपका दिल, दिमाग की चीजों चालाकियों से नहीं भरा होता, तब प्रेम से भरा होता है। एकमात्र... आगे पढ़े

जब हम ध्यान करते हैं तो ध्यान हमारे भीतर उतरता है

Updated on 8 June, 2015, 9:20
'जब हम ध्यान करते हैं तो अपने भीतर को समझने के प्रयास पर होते हैं। वहां तथ्य नहीं होते बल्कि अनुभव ही होते हैं। वहां खोज नहीं बस एक शांति होती है।' ध्यान, निस्तब्ध और सुनसान मार्ग पर इस तरह उतरता है जैसे पहाड़ियों पर सौम्य वर्षा। यह इसी तरह सहज... आगे पढ़े

अपना दुख चाहिए या किसी और का?

Updated on 7 June, 2015, 17:21
एक महात्मा को जब उनके श्रद्धालुओं और अनुयायियों ने बहुत तंग किया, तो वे हिमालय पर्वत पर रहने लगे। उन्हें ध्यान के लिए एकांत चाहिए था। मगर उनके बारे में श्रद्धालुओं को पता चल गया। श्रद्धालुओं को यह विश्वास था कि वे उन्हें दुखों और समस्याओं से छुटकारा दिला सकते... आगे पढ़े

एक सफल और सार्थक जीवन के लिए समझ और समझौता बहुत जरूरी है

Updated on 6 June, 2015, 9:40
एक सफल और सार्थक जीवन के लिए समझ और समझौता बहुत जरूरी है। व्यक्ति यदि समझौता करना नहीं जानता, तो छोटी-छोटी घटनाएं भी विकराल बन जाती हैं। समझौते के बगैर दुनिया में कभी काम नहीं चलता। महायुद्ध होता है, बड़ी-बड़ी लड़ाइयां होती हैं, वहां भी आखिर में समझौते और संधि... आगे पढ़े

हर आदमी के जीवन में किसी न किसी बात की लगन होती है

Updated on 6 June, 2015, 9:39
हर आदमी के जीवन में किसी न किसी बात की लगन होती है। यह लगन समाज सेवा से लेकर किसी भी प्रकार की हो सकती है। आपने देखा होगा कि कोई पुरानी वस्तुओं का तो कोई सिक्कों का, डाक टिकटों का तो कोई खाने-पीने या नए परिधानों के संग्रह का... आगे पढ़े

अपने सिर पर आई मौत को भी मात दे सकते हैं

Updated on 2 June, 2015, 11:55
महावीर एक गांव के पास से गुजर रहे थे। उनका शिष्य गोशालक उनके साथ था, जो बाद में उनका विरोधी हो गया। दोनों एक पौधे के पास से गुजर रहे थे। गोशालक ने महावीर से कहा, यह पौधा देखिए। क्या सोचते हैं आप, इसमें फूल लगेंगे या नहीं लगेंगे? महावीर... आगे पढ़े

हमारे भीतर ही है प्रेरणा

Updated on 1 June, 2015, 13:39
हमारे रोजमर्रा के जीवन में चलने वाले अप्रत्यक्ष संग्राम को किसी हथियार से नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपी शक्ति से ही जीता जा सकता है। स्वामी विवेकानंद के इस कथन के मुताबिक जब प्रेरणा अंदर से आएगी, तभी आप अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकेंगे... बच्चा रोज स्कूल के मैदान... आगे पढ़े

जब 'मन' नहीं होता तब होता है ध्यान

Updated on 31 May, 2015, 8:14
मन के माध्यम से ध्यान तक नहीं पहुंचा जा सकता। ध्यान इस बात का बोध है कि मैं 'मन' नहीं हूं। ध्यान चेतना की विशुद्ध अवस्था है। जहां न विचार होता है, न कोई विषय। साधारणत: हमारी चेतना विचारों से, विषयों से, कामनाओं से आच्छादित रहती है। जैसे कि कोई दर्पण... आगे पढ़े

यहां छिपा हैं जिंदगी से परेशान लोगों के लिए समाधान

Updated on 29 May, 2015, 8:15
जीवन कई चुनौतियों से भरा है। इनके दबाव से कई मौकों पर लोग टूट जाते हैं। वे महसूस करते हैं कि जितनी समस्याएं सामने हैं उनका वे मुकाबला नहीं कर पाएंगे। कई मर्तबा लोग महसूस करते हैं कि वे दुनिया की सबसे खराब नौकरी या काम कर रहे हैं। कुछ महसूस... आगे पढ़े

रिश्तों की डोरी में एक धागा मेरा एक तुम्हारा...

Updated on 28 May, 2015, 13:32
वो प्यार ही क्या जो चंद लफ्जों में बंध कर रह जाएं, ऊंच-नीच, जाति-धर्म और जन्म-उम्र से बंध जाएं। प्यार तो है बस मन का मिलना, ये आदत तो हर रंग संग रंग जाएं। ये मोहब्बत चीज क्या है? ये सवाल बार-बार जेहन में उठता है। सोचते-सोचते साल महिने और... आगे पढ़े

हर सुबह एक नया जीवन, नए मन से इसे जियो

Updated on 24 May, 2015, 8:06
ज़िंदगी में बहुत कुछ ऐसा घटित होता है। जिसके कारण हम काफी परेशान हो जाते हैं। ऐसे में धार्मिक प्रवचन और सकारात्मक विचार ही हमें इन समस्याओं से उबारने में बहुत मदद करते हैं। ऐसे में क्रांतिकारी संत मुनिश्री तरुणसागर के कड़वे प्रवचन बहुत ज्यादा कारक सिद्ध होते हैं। मुनि... आगे पढ़े

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