Sunday, 25 June 2017, 10:43 PM

जीवन मंत्र

सत्य कहना और सहना दोनों ही कठिन हैं

Updated on 22 August, 2015, 12:36
सत्य ईश्वर प्रदत्त वह दिव्य शक्ति है, जिसे सांसारिक एषणाओं की कोई भी तीव्रतर व दृढ़तम तलवार काटने का साहस नहीं कर सकती। सत्य वह कवच है, जिस पर झूठ, फरेब, अनास्था, अनाचार, पाप, पश्चाताप, वैमनस्य और ईष्र्या के दुर्ग सहज रूप में टकराकर बुर्ज-बुर्ज हो जाते हैं। सत्य कहना... आगे पढ़े

तुलना और स्पर्धा की दौड़ में इसीलिए बने रहें?

Updated on 20 August, 2015, 7:54
जब आपकी तुलना किसी दूसरे से की जाती है आपकी पढ़ाई के बारे में, आपके खेलकूद के बारे में अथवा आपके रूप या चेहरे के बारे में-तब आप व्यग्रता, घबराहट और अनिश्चितता के भाव से भर जाते हैं। इसलिए यह नितांत आवश्यक है कि हमारे विद्यालय में तुलना का यह एहसास,... आगे पढ़े

जिंदगी में हमेशा चीजों से उलझने के बजाय बचना सीखो

Updated on 18 August, 2015, 13:55
मेरा मानना है कि सकारात्मक नजरिया दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण चीज है। हमारी तमाम अच्छाइयां इसी से निकलती हैं कि हम जिंदगी को कितनी सकारात्मकता के साथ देखते हैं। कोई भी इंसान कई मौकों पर बाहरी दुनिया में असफल होता है और उसके भीतर भी कश्मकश चलती रहती है। लेकिन... आगे पढ़े

खुद को आजाद करने का एक पल

Updated on 16 August, 2015, 9:05
'कूद कर तो देखो, तुम्हें बचाने वाला एक जाल अपने-आप प्रकट हो जाएगा।' मशहूर अमेरिकी लेखक सैली हॉग्सहेड की कही इस बात का मर्म मैं आगे एक और प्रश्न पूछकर समझाना चाहूंगी। क्या आप उन लोगों में से हैं, जो किसी ना किसी 'डर' की दासता में अपना जीवन गुजार रहे... आगे पढ़े

दरवाजे बताते हैं जिंदगी का रहस्य

Updated on 16 August, 2015, 9:02
हर रोज एक ही राह से होकर गुजरना वहीं ले जाता है, जहां हम हर रोज पहुंचते हैं। और जब चल ही एक राह पर रहे हैं, तो फिर नई मंजिलें न पा सकने की उदासी क्यूं? जीवन में कुछ नया चाहिए तो नए दरवाजे चुनने ही पड़ते हैं। ये... आगे पढ़े

देने के भाव से खुद को बनाएं देव

Updated on 16 August, 2015, 8:32
दुनिया में दो तरह के प्राणी होते हैं। कुछ प्राणी जो प्राप्त करते हैं, उसे वे अपने तक ही सीमित रखते हैं और कुछ प्राणी उसे बांट देते हैं। अगर आप बांटने का चुनाव करते हैं तो आप देव बन जाते हैं। अगर आप उसे जमा करते जाते हैं तो... आगे पढ़े

सभी प्राणी सुख से जीना चाहते हैं

Updated on 14 August, 2015, 11:34
सभी प्राणी सुख से जीना चाहते हैं। दुख सभी को अप्रिय है। फिर भी दुख बिना बुलाए मेहमान की तरह जीवन में आ जाते हैं। अतिथि की तरह दुख हमारे जीवन-द्वार पर बार-बार आकर दस्तक देते हैं। पिछले जन्म में हमने जो कर्म किए, उन्हें हम देख नहीं सकते हैं।... आगे पढ़े

मनुष्य को नीति-मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए

Updated on 13 August, 2015, 11:24
 पापों से विमुक्त होकर, भले व्यवहार से प्रभु-निकटता पाकर अलौकिक आनंद का अनुभव करना ही मुक्ति है। आशय यह है कि पापों से और पशुत्व से छूटकर शाश्वत आनंद प्राप्त करना ही मुक्ति है। आत्मा के गुणों की वृद्धि करके उसके अनुकूल बनाना ही ‘मुक्ति-मार्ग’ है। सभी शक्तियों की उन्नति... आगे पढ़े

स्वर्ग या नर्क? हमारे हाथ में हैं दोनों

Updated on 11 August, 2015, 9:23
अपने जीवन के हर क्षण को आनंदपूर्ण बनाना व्यक्ति के ही हाथ में होता है। अगर वह अपने ईगो पर नियंत्रण रखता है तो अपनी आंतरिक सुंदरता को विस्तार देता है और दूसरों से अधिक सहजता से जुड़ पाता है। जीवन को समृद्ध और सुंदर बनाने के लिए ईगो का... आगे पढ़े

7 सूत्र सफलता के

Updated on 10 August, 2015, 8:28
हर कोई अपने कॅरियर में सफल होना चाहता है। यह बात और है कि सफल होने की तमन्ना रखने वाले लोगों में से बहुत से लोग सार्थक प्रयास नहीं करते हैं... 1. कार्य को टालें नहीं कार्य टालने की आदत आपको असफलता की राह पर ले जाती है। किसी कार्य को करने... आगे पढ़े

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

Updated on 8 August, 2015, 11:29
 जीवन के किसी भी क्षेत्र और अवस्था में यदि असफलता हाथ लगती है, तो उसका कारण केवल मेहनत की कमी नहीं होता। मेहनत को प्रेरित करने वाला तत्व संकल्प शक्ति है। इतिहास साक्षी है कि कठिनाइयों का सामना अपने अदम्य साहस और अटूट विश्वास के बल पर किया जा सकता... आगे पढ़े

जब गुस्सा आए तो विवेक आजमाएं

Updated on 7 August, 2015, 7:31
जापान के किसी गांव में एक समुराई बूढ़ा योद्धा रहता था। उसके पास कई समुराई युद्धकला सीखने आते थे। एक बार एक विदेशी योद्धा उसे पराजित करने के लिए आया। वह साहसी था। उसके बारे में यहां तक कहा जाता था कि वह जहां भी जाता विजय होकर ही वापस... आगे पढ़े

किसी काम को छोटा नहीं समझना चाहिए

Updated on 6 August, 2015, 13:24
नेपोलियन बोनापार्ट कहीं जा रहा था। रास्ते में उसकी नजर एक दृश्य पर पड़ी। वह रुक गया। उसने देखा कई कुली मिलकर भारी खंभों को उठाने का प्रयास कर रहे हैं। पास में ही खड़ा एक व्यक्ति उन्हें तरह- तरह के निर्देश दे रहा है। नेपोलियन ने उस आदमी के... आगे पढ़े

यह एक आनंदोत्सव है

Updated on 6 August, 2015, 7:43
 वैराग्य जीव को तब होता है जब परमात्मा उस पर अनंत कृपा करते हैं। इस मानव जीवन में यदि कही भय नहीं है तो वह है केवल वैराग्य में और त्याग में, समर्पण में। बाकी तो कदम-दर-कदम भय ही भय है और जहां भय है वहां जीवन यात्र निर्विध्न पूरी... आगे पढ़े

हार के साथ करें जीत की तैयारी

Updated on 5 August, 2015, 7:34
जब व्यक्ति किसी नौकरी के लिए आवेदन करता है तो सामान्यत: वह अपनी योग्यताओं को दिखाने का प्रयास करता है। अक्सर नियोक्ताओं के पास ऐसे ही रिज्यूम बहुतायत में पहुंचते हैं जिनमें उम्मीदवारों ने अपनी खूबियों का बखान किया होता है। इन्हें पढ़कर वे यही सोचते हैं कि इस तरह... आगे पढ़े

शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं

Updated on 4 August, 2015, 11:51
शब्दों के माध्यम से व्यक्ति को किसी भी भाव व रिश्ते का अहसास होता है। शब्दों के द्वारा ही व्यक्ति अपने विचारों का आदान-प्रदान करता है। शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। वे व्यक्ति के विचारों को प्रभावित करते हैं। सही मायनों में शब्द हमारे विचारों की मुद्रा होते हैं। शब्दों... आगे पढ़े

रिमझिम बरसती बारिश की बूंदें! कितना सुकून देती हैं मन को

Updated on 30 July, 2015, 13:10
पहली बारिश और तुम्हारी याद ना आएं ये कैसे हो सकता है, बारिश का इंतजार वैसे तो सबको होता है पर सबसे ज्यादा उसे होता है जिसे बारिश, बारिश का मौसम पंसद हो और, हां सच्चे दिल से किसी से प्यार हो। बारिश में भीगना फुहारों के साथ मस्ती करना... आगे पढ़े

ऐसी होती है आत्मा

Updated on 28 July, 2015, 7:22
संस्कृत शब्द 'आत्मा' का अनुवाद अक्सर अंग्रेजी में 'सोल' या फिर 'स्पिरिट' के रूप में किया जाता है। मगर इन तीनों शब्दों की जड़ें अलग-अलग हैं और अर्थ भी। 'स्पिरिट' ग्रीक मूल का है, 'सोल' ईसाई मूल का और 'आत्मा' हिंदू मूल का। ग्रीस में लोग मानते थे कि जब कोई... आगे पढ़े

दान देने का संबंध स्वयं से है किसी और से नहीं

Updated on 26 July, 2015, 12:07
अगर आप कुछ दान करते हैं तो वह आपके उत्कर्ष से जुड़ा है। देते हुए दूसरे की स्थिति के बारे में ज्यादा आकलन ठीक नहीं है। दान देने का संबंध सिर्फ आपकी भावनाओं से है। अगर मन कहता है कि आपको कुछ देना चाहिए तो दीजिए और अगर मन नहीं... आगे पढ़े

करें रिश्तों की साफ-सफाई

Updated on 21 July, 2015, 14:02
अगर झाड़-पोंछ न की जाए तो घर के कोने-कोने में धूल जम जाती है। ठीक इसी तरह हमारे रिश्ते-नातों पर अनजाने में सिलवटें पड़ जाती हैं। वक्त के साथ उन पर धूल की परतें भी जम जाती हैं। वजह कुछ भी हो सकती है। समय-समय पर यदि हम अपने रिश्तों... आगे पढ़े

प्रार्थना से करें अंतस मन की पवित्रता

Updated on 19 July, 2015, 8:59
प्रार्थना करना लिखे हुए कुछ शब्दों को दोहराना भर नहीं है। प्रार्थना का अर्थ होता है परमात्मा का मनन और उसका अनुभव। प्लेटो ने कहा था,'आत्मा का खुद से बातचीत करना ही मनन कहलाता है।' जब हम आत्मा अर्थात अपने भीतर अवस्थित आत्म-तत्व से बातचीत करते हैं, तो वह प्रार्थना है... आगे पढ़े

ये होते हैं स्वार्थ और परमार्थ के रंग

Updated on 18 July, 2015, 13:15
जो परमार्थ दिखावे के लिए होता है, वह स्वार्थ से भी बुरा है और जो स्वार्थ सबके हित में हो, वह परमार्थ से भी अच्छा है। परमार्थ को हम जितनी ऊंचाइयों के साथ देखते हैं, स्वार्थ को उतनी ही हेय दृष्टि से देखा जाता है। लेकिन मेरा मानना है कि... आगे पढ़े

नहीं दरकेंगे रिश्ते

Updated on 16 July, 2015, 13:25
शादी के बाद डेटिंग करें तो मिलेगा क्वालिटी टाइम। कभी लांग ड्राइव पर निकल जाएं तो कभी फिल्म देख आएं। कभी दस मिनट रुककर आइसक्रीम खा लें तो गुजार सकते हैं बेहतरीन पल। हाल ही में आया एक सर्वे बताता है कि क्वालिटी टाइम की कमी से रिश्ते दरक रहे... आगे पढ़े

जीवन में समता यानी संतुलन बहुत जरूरी है

Updated on 14 July, 2015, 13:13
जीवन में समता यानी संतुलन बहुत जरूरी है, लेकिन अधिकांश लोगों का जीवन असंतुलित बना हुआ है। हमने एक ऐसी मानसिक स्थिति का निर्माण कर रखा है कि सुख की स्थिति आने पर हम खुशी से उछल जाते हैं और दुख की स्थिति में मानो मुरझा जाते हैं जबकि हमें... आगे पढ़े

यह है हमारे दुखी रहने का कारण, इससे ऐसे बचें

Updated on 14 July, 2015, 7:23
हम अपेक्षा के सागर में डूबते-उतराते रहते हैं, यही हमारे दुखी रहने का कारण है। यदि हम दूसरों से अपेक्षाएं न लगाकर, दूसरों को बदलने के बजाय खुद को बदलें, तभी हम अपेक्षाओं के सागर के पार उतर सकेंगे। एक अरसे बाद मुलाकात में एक मित्र बातों ही बातों में पते... आगे पढ़े

भूत सिद्धि – शरीर को शून्य में विलीन करना

Updated on 11 July, 2015, 16:38
अगर किसी को पांच तत्वों पर सिद्धि प्राप्त हो, तो शरीर का त्याग करके उसे शून्य में विलीन किया जा सकता है। फिर शरीर का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता। बहुत से योगियों ने ऐसा किया है। तमिलनाडु में वल्लालर रामालिंगा आदिगालार नाम के एक योगी थे। एक दिन, वे एक... आगे पढ़े

एकत्व-बोध की ऊर्जा

Updated on 11 July, 2015, 13:07
भेदभाव करने वाले अक्सर दुखी और निराश दिखाई देते हैं, जबकि समानता का व्यवहार करने वाले हमेशा प्रसन्न और ऊर्जावान। भारतीय दर्शन सभी जीवों में एकत्व की बात कहकर लोगों को अपनी ऊर्जा का सही उपयोग करने की सलाह देता है... एक सांप परिवार के साथ बिल में रहता था। इसी... आगे पढ़े

मनुष्य को दूसरे से ईष्या नहीं रखना चाहिए जो ऐसा करता है वह सुखी नहीं रहता

Updated on 11 July, 2015, 13:01
इटारसी। श्री द्वारिकाधीश बड़ा मंदिर में इस समय पुरूषोतम मास की आखरी और चौथी कथा शिवपुराण की चल रही है। कथा व्यास आचार्य नरेन्द्र शास्त्री को सुनने सैकड़ो श्रद्घालु आ रहे है। श्रीमती शांतिदेवी पगारे एवं श्री महादेव पगारे की स्मृति में शिव पुराण का आयोजन किया गया है। कथा... आगे पढ़े

जीवन में जागृति नितांत आवश्यक है

Updated on 9 July, 2015, 12:04
जीवन में जागृति नितांत आवश्यक है। जीव की परमगति में जागृति का विशेष महत्व है। हम कई बार सोते और जागते हैं, परंतु ध्यान देने योग्य बात यह है कि समय कभी नहीं सोता। अगर समय सो गया, तो हम और आप सब हमेशा के लिए सो जाएंगे। सोये रहने... आगे पढ़े

हम जो देते हैं वही हमारा गुण बन जाता है

Updated on 9 July, 2015, 7:27
पानी, हवा, अंतरिक्ष और पूरा जगत ही रंगहीन है। यहां तक कि जिन चीजों को आप देखते हैं, वे भी रंगहीन हैं। रंग केवल प्रकाश में होता है। आप जो भी रंग चाहते हैं, वे सभी सिर्फ प्रकाश में है। अगर प्रकाश किसी वस्तु पर पड़ता है और वह वस्तु कुछ... आगे पढ़े

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