Tuesday, 25 April 2017, 10:03 AM

उपदेश

धर्म के मायने प्रेम, करुणा और सद्भावना है

Updated on 14 March, 2015, 12:16
धर्म सफल और सार्थक जीवन का आधार है। यह सिर पर धारण करने वाली पगड़ी नहीं, जिसे घर से दुकान के लिए चले तो पहन लिया और दुकान पर जाकर उतार कर रख दिया। धर्म तो आत्मा का स्वभाव है। धर्म के मायने प्रेम, करुणा और सद्भावना है। उसका प्रतीक फिर... आगे पढ़े

मन को विश्राम देकर ही हम सृजनशील हो सकते हैं

Updated on 13 March, 2015, 13:32
हम में से अधिकांश लोगों के मन बहुत सारी बातों से भरे पड़े हैं। सुखद-दुखद अनुभवों, ज्ञान, व्यवहार और रीति-रिवाजों से। हमारा मन कभी खाली नहीं रहता। जबकि सृजन उसी मन में हो सकता है, जो पूरी तरह से खाली हो। जब आप कोई चीज कहीं रखकर भूल जाएं या किसी... आगे पढ़े

सफल होने के लिए जरूरी है छटपटाहट

Updated on 12 March, 2015, 7:41
महान दार्शनिक सुकरात से एक बार एक युवक मिला। उसने सफलता पाने का उपाय पूछा। सुकरात ने उसे अगले दिन आने के लिए कहा। अगले दिन युवक ने फिर से वही सवाल पूछा तो सुकरात ने उसे फिर से अगले दिन आने को कहा। कई महीने बीत जाने के बाद भी... आगे पढ़े

अनमोल वचन

Updated on 10 March, 2015, 12:03
नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो कर्मण:। शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मण:॥ अर्थ : जो तुम्हारा काम है, उसे करो। क्योंकि कर्म से ही अकर्म पैदा होता है। कर्म किए बिना तो शरीर की यात्रा भी संभव नहीं हो सकती। भावार्थ : इस श्लोक का भावार्थ है अपने कर्तव्य से डिगना नहीं चाहिए।... आगे पढ़े

फूलों की सुंदरता में छुपे राज को जानकर दिल भर आएगा

Updated on 10 March, 2015, 12:01
किसान रतिराम रोज सुबह उठकर दूर झरने से स्वच्छ पानी लाया करता था। वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें एक लाठी से कांवड़ की तरह कंधे पर लटका लेता था। एक घड़ा तो सही था, मगर दूसरा कहीं से फूटा हुआ था। घर पहुंचते-पहुंचते वह आधा... आगे पढ़े

क्यों मुस्कुराए बौद्ध संत

Updated on 9 March, 2015, 12:54
एक चीनी कवि सू तुंग-पो को राजदरबार में राज कवि की पदवी प्राप्त थी, इस बात का उसे अभिमान था। वहीं एक बौद्ध संत भी थे बुद्धस्तंप, जिनके दर्शन-चिंतन के आगे कवि महोदय टिक न पाते थे। एक दिन सू बौद्ध मंदिर गए। वहां उन्होंने बुद्धस्तंप नाम के एक बौद्ध संत... आगे पढ़े

शिखा रखने के यह पांच फायदे नहीं जानते होंगे

Updated on 8 March, 2015, 8:38
सिर के पीछे एक केन्द्रस्थान होता है प्राचीन काल में लोग भले ही पूरे सिर के बाल कटवा लेते थे लेकिन इस स्थान के बाल नहीं कटवाते थे। इस स्थान के बालों को शिखा के नाम से जाना जाता है। आज भी बहुत से लोग हैं जो शिखा रखते हैं। शास्त्रों... आगे पढ़े

मानसिक जंजीरों को खोल कर तो देखिए

Updated on 7 March, 2015, 12:31
एक व्यक्ति कहीं से जा रहा था, अचानक उसे सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा और वह रुक गया। उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है। उसे इस बात पर आश्चर्य हुआ कि हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस... आगे पढ़े

जब फरिश्ता ने दिया खलीफा उमर को दिव्य संदेश

Updated on 5 March, 2015, 9:19
एक बार खलीफा उमर अपने धर्मस्थान पर बैठे थे कि उन्हें स्वर्ग की ओर उड़ता हुआ एक फरिश्ता दिखाई दिया। उसके कन्धे पर एक बड़ी सी पुस्तक थी। खलीफा ने उसे बुलाकर पूछा, इस पुस्तक में क्या है ? फरिश्ते ने जबाव दिया, इसमें उन लोगों की सूची है, जो... आगे पढ़े

ऐसे कीजिए वासना की परत को छूमंतर

Updated on 4 March, 2015, 9:38
एक धनी व्यक्ति किसी फकीर के पास गया और कहने लगा कि, 'मैं प्रार्थना करना चाहता हूं, लेकिन तमान कोशिशों के बावजूद प्रार्थना नहीं होती। वासना बनी रहती है। चाहे जितना आंख बंद कर लूं लेकिन परमात्मा के दर्शन नहीं होते।' इसीलिए आप बताइए कि मैं क्या करूं? क्या कारण... आगे पढ़े

तो यहां से आया 'प्रतिमा' शब्द

Updated on 2 March, 2015, 11:37
हम मंदिर जाते हैं, चर्च जाते हैं, और यहां ईश्वर की प्रतिमा के सामने नतमस्तक होकर अपनी मनोकामना पूरी होने की अभिलाषा करते हैं। लेकिन हम जिस मूर्ति के सामने सजदा करते हैं, कभी सोचा है ? इस मूर्ति (प्रतिमा) का अर्थ क्या है? अमूमन धार्मिक लोगों का जबाव 'न'... आगे पढ़े

एक चमत्कारी घटना से जब दादू बन गए संत

Updated on 1 March, 2015, 13:00
दादू दयाल प्रसिद्ध संत हुए हैं। उनकी वाणी ने अनगिनत लोगों को प्रेरणा दी है। संत होने से पहले उनकी एक दुकान हुआ करती थी। उसी से उनकी गुजर-बसर होती थी। एक बार ऐसी घटनी हुई कि उनका जीवन ही बदल गया। एक दिन वह जब अपनी दुकान पर बैठे हिसाब... आगे पढ़े

कृपा को महसूस करें: मोरारी बापू का चिंतन..

Updated on 27 February, 2015, 13:21
कृपा भक्ति का सर्वश्रेष्ठ वरदान है। हम यह महसूस करें कि परित: कृपा बरस रही है। मोरारी बापू का चिंतन.. तुलसी दास और जगद्गुरु आदि शंकराचार्य दोनों ने सत्संग को आवश्यक माना है। शंकराचार्य कहते हैं, एक तो मनुष्य होना अपने आप में दुर्लभ घटना है, फिर उसमें मुमुक्षु भाव जागे... आगे पढ़े

बड़े काम की हैं ये चार बातें

Updated on 26 February, 2015, 13:15
एक साधु थे। उनसे शिक्षा लेने के लिए बहुत से स्त्री पुरुष आते थे। साधु उन्हें बड़ी ही उपयोगी बातें बताया करते थे। एक दिन उन्होंने कहा, 'तुम लोग चार बातें याद रखो तो जीवन का आनंद ले सकते हो।' लोगों ने पूछा, 'स्वामी जी, वे चार बातें क्या हैं ?' स्वामीजी... आगे पढ़े

इंसानियत का नाता

Updated on 25 February, 2015, 13:50
ईश्वर की नजर में सब इंसान बराबर हैं। ऐसे में किसी को नीचा या या ऊंचा समझना ठीक नहीं। एक-दूसरे को आदर-सम्मान और यथासंभव सहयोग देने से ही समाज व देश मजबूत होकर आगे बढ़ता है। विश्व सामाजिक न्याय दिवस (20 फरवरी) को था। मिसेज शर्मा फुर्सत मिलते ही बुटीक के... आगे पढ़े

लक्ष्य को पाना हो सकता है आसान

Updated on 24 February, 2015, 13:22
जाग रे सब रैन बिहाणी, जाए जनम अंजलि का पाणी। घडि़-घडि़ घडि़याल बजावे, जे दिन जादू सो बहुरि न आवै॥ - दादू अर्थ : जागो, रात बीत चुकी है। हमारा जीवन इस तरह रीत रहा है, जैसे अंजुरी में भरा हुआ पानी रिसने लगता है। ऐसे में घंटे-घडि़याल बजाकर समय व्यर्थ करने से... आगे पढ़े

इस तरह, मृत्यु के समय भी आप ईश्वर का नाम स्मरण कर मोक्ष पा सकते

Updated on 23 February, 2015, 13:14
अपने आखिरी क्षणों में मृत्यु के समय जब प्राण शरीर को त्यागने वाले हों तब भी आप नारायण नाम ही स्मरण करेंगे क्योंकि यह स्वाभाविक रूप से आपको आएगा और यह कई प्रकार से उत्थान करेगा। प्रश्न- गुरुदेव, कहा जाता है कि जीवन के अंतिम क्षणों में नारायण का नाम जपने... आगे पढ़े

मीठा सच

Updated on 21 February, 2015, 13:31
इंग्लैंड के राजा चाल्र्स द्वितीय को बड़ी कुशलता से अपनी राय दी साहित्यकार जॉर्ज बर्नार्ड शॉ न् प्रसिद्ध साहित्यकार जॉर्ज बर्नार्ड शॉ के जीवन के बारे में यह कहानी कही जाती है, जो हमें बताती है कि सत्य तब कड़वा नहीं लगता है, जब उसे बोलने का हुनर मालूम हो। इंग्लैंड... आगे पढ़े

बारिश देने वाले देवता के रूप में पूजे जाते है, पांडवों के ये आराध्यदेव

Updated on 20 February, 2015, 13:02
मंडी जनपद के देवी-देवताओं में बड़ादेव कमरूनाग का विशेष स्थान है। शिवरात्रि महोत्सव में शिरकत करने वाले बड़ादेव कमरूनाग जनपद के देवी-देवताओं में महामहिम हैं। देव परंपरा के अुनसार बड़ादेव कमरूनाग को मंडी जनपद में वरिष्ठ देवता के रूप में पूजा जाता है। बड़ादेव को वर्षाप्रदाय यानी बारिश देने वाले देवता... आगे पढ़े

घर में अवश्य लगाएं तुलसी के पौधे क्योंकि..

Updated on 19 February, 2015, 13:39
तुलसी एक ऐसा पौधा है। जिसके लाभ अनेकानेक हैं और इसे विज्ञान भी मान चुका है। तुलसी के कई प्रकार हैं जैसे रक्त तुलसी, राम तुलसी, भू तुलसी, वन तुलसी, ज्ञान तुलसी, मुख्यरूप से विद्यमान है। तुलसी की इन सभी प्रजातियों के गुण अलग है। इन्हीं में से कुछ ऐसे... आगे पढ़े

स्वयं से करें प्रेम

Updated on 18 February, 2015, 13:33
स्वामी विवेकानंद 'राजयोग में लिखते हैं, 'प्रत्येक इंसान ईश्वर का अंश है। यदि कोई इंसान ईश्वर के प्रति अपनी भक्ति दिखाना चाहता है, तो सबसे पहले स्वयं की अवहेलना करना छोड़े और स्वयं से प्यार करना सीखे। प्रेम से ही चेतना जाग्रत होती है। जब मैंने योग और ध्यान के माध्यम... आगे पढ़े

मनुष्य के शरीर में पंचतत्वों का संतुलन परमावश्यक है

Updated on 16 February, 2015, 13:11
मनुष्य के शरीर में पंचतत्वों का संतुलन परमावश्यक है। मनुष्य जीवन में भौतिक भाव सदैव रहता है, लेकिन हमें इस भाव का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। मनुष्य को अगर वन में छोड़ दें, तब भी प्रकृति उसे भौतिकता का बोध करा ही देती है। प्रकृति में तरह-तरह के पेड़-पौधे और... आगे पढ़े

नृत्य ही पूजा है

Updated on 14 February, 2015, 8:11
मेरे लिए नृत्य ही पूजा है. नृत्य ही ध्यान है. नृत्य से ज्यादा सुगम कोई उपाय नहीं, सहज कोई समाधि नहीं. जितनी आसानी से तुम अहंकार को नृत्य में विगलित कर पाते हो उतना किसी और चीज में कभी नहीं कर पाते. नाच सको अगर दिल भरकर तो मिट जाओगे. नाच... आगे पढ़े

सुख की भीतरी नदी, हमारे दुख के क्या कारण है

Updated on 13 February, 2015, 11:43
महात्मा बुद्ध ने कहा था कि जीवन दुखाय है, किंतु उन्होंने दुख के कारणों और उसे दूर करने के उपायों पर भी प्रकाश डाला है। बुद्ध दुख की नाव पर बैठाकर सुख की भीतरी नदी में ले जाते हैं। धम्मपद का पहले ही पद का अर्थ है- 'मन सभी प्रवृत्तियों का... आगे पढ़े

सत्संग सफलता का प्रवेश द्वार

Updated on 12 February, 2015, 10:51
सत्संग का अर्थ लोग प्रवचन सुनना समझते हैं, लेकिन इसका अर्थ है अच्छे लोगों से मिलना, अच्छी पुस्तकेें पढ़ना, अच्छी बातें सोचना आदि। किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने का यह प्रवेश द्वार है। सत्संगत्वे निस्संगत्वं निस्संगत्वे निर्मोहत्वम। निर्मोहत्वे निश्चलतत्वं निश्चलतत्वे जीवन्मुक्ति:।। अर्थ : सत्संग से निस्संगता पैदा होती है और निस्संगता से अमोह!... आगे पढ़े

अनमोल वचन

Updated on 11 February, 2015, 10:13
सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत्। सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृता:॥18-48॥ अर्थ : हे कौन्तेय (अर्जुन), अपने आरंभ के सहज-स्वाभाविक कर्म को दोष होने पर भी नहीं त्यागना चाहिए, क्योंकि आरंभ में कर्मों में कोई न कोई दोष होता ही है, जैसे आरंभ में अग्नि धुएं से घिरी होती है...। भावार्थ : जब भी... आगे पढ़े

नर हो ना निराश करो मन को...

Updated on 10 February, 2015, 13:52
जीवन के किसी मोड़ पर असफलता मिलने पर हमें निराश होने की बजाय अदम्य उत्साह और ऊर्जा के साथ लक्ष्य-पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। हार से ही जीतने का रास्ता मिलता है। हारने के बाद हम गलतियों को नहीं दोहराते, तब सफल होने का अवसर आता है। इस... आगे पढ़े

कुछ भी घृणा योग्य नहीं..

Updated on 9 February, 2015, 13:55
मित्रों फूल बन जाती है और गंदगी खाद बनकर सुगंध में परिणत हो जाती है। ऐसे ही मनुष्य के विकार हैं, जो पशु जैसे दिखते हैं, वही दिशा परिवर्तित होने पर दिव्यता बन जाते हैं। वस्तुत: अदिव्य कुछ भी नहीं है। जीवन दिव्यता है। भेद केवल अभिव्यक्ति का है। इस... आगे पढ़े

पूर्ण ज्ञान का मार्ग

Updated on 8 February, 2015, 8:53
एक ज्ञान है, जो भर तो देता है मन को बहुत सारी जानकारी से, लेकिन हृदय को शून्य नहीं करता है. एक ज्ञान है, जो मन को भरता नहीं, खाली करता है. हृदय को शून्य का मंदिर बनाता है. एक ज्ञान है, जो सीखने से मिलता है और एक ज्ञान है... आगे पढ़े

प्रेम और मोह में अंतर

Updated on 7 February, 2015, 13:16
यजुर्वेद में लिखा है कि बुराइयों को द्वेष की अपेक्षा प्रेम से दूर करना ज्यादा सरल है। इसी प्रकार ताओ धर्म कहता है कि प्रेम के आधार पर ही मनुष्य वीर बन सकता है। प्रेम ही है, जो अंधकार को प्रकाश में, निर्जीवता को जीवन में और मरघट को उद्यान... आगे पढ़े

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