Wednesday, 28 June 2017, 5:40 AM

उपदेश

प्रकृति ने दी है इंसान को ये नेमत

Updated on 2 May, 2015, 14:53
अमेरिका निवासी प्रसिद्ध धनी और क्रीड़ा प्रेमी वाण्डर बिल्ट किसी काम के सिलसिले में इटली के प्रमुख नगर कुस्तुन्तुनिया गए हुए थे। संयोग से उन्हीं दिनों फ्रांस के अभिनेता कॉकलिन भी कुस्तुन्तुनिया आए हुए थे। जब विनोदी और रसिक स्वभाव वाले वाण्डर बिल्ट ने यह बात सुनी तो उसने कुस्तुन्तुनिया की... आगे पढ़े

कलम मजदूरों के बेफिजूल चोंचले

Updated on 2 May, 2015, 7:40
बहुत से लेखकों के बारे में मशहूर है कि वे ऐसे कागज पर लिखते हैं, फलां मूड में लिखते हैं। किस्म-किस्म की कलम से लिखते हैं। और न जाने क्या-क्या। लेकिन उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद्र इस दिखावटी तामझाम से दूर रहते थे। एक बार किसी ने उनसे पूछा, 'मुंशीजी, आप कैसे... आगे पढ़े

हरी घास पर मन का चोर

Updated on 1 May, 2015, 8:39
इंग्लैंड के विख्यात कवि वायरन अपने स्वास्थ्य सुधार के लिए जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में निवास कर रहे थे। एक दिन उनके बचपन का दोस्त उनसे मिलने पहुंचा, तो वे बहुत प्रसन्न हुए। दोस्त को वह शाम में पार्क घूमाने ले गए। जब मित्र का ध्यान पार्क की कोमल घास पर गया तो... आगे पढ़े

हमारे भीतर है अच्छाई

Updated on 30 April, 2015, 13:31
लेखक और दार्शनिक कॉलिन विल्सन की यह कहानी हमें बताती है कि जो कुछ है, वह हमारे भीतर ही है। बस हमें अच्छे को चुनना होता है...मशहूर अंग्रेजी लेखक कॉलिन विल्सन (1931-2013) आधुनिक युग के महत्वपूर्ण दार्शनिकों में जाने जाते हैं। अपनी आत्मकथा 'ड्रीमिंग टु सम परपज के पहले अध्याय... आगे पढ़े

कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना

Updated on 28 April, 2015, 9:28
अमेरिकन राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के विरोधी, अखबारों में जी-खोलकर उनकी बुराई करते थे। लेकिन, लिंकन इन बातों से विचलित नहीं होते थे और अपने काम मे जुटे रहते थे। एक दिन उनके मित्र ने उनसे कहा, 'विरोधी लोग आपके खिलाफ चाहे अनेक ऊल-जलूल बातें अखबारों में प्रकाशित करवाते रहें, उनकी बातों... आगे पढ़े

विज्ञान और अध्यात्म का नाता

Updated on 27 April, 2015, 13:03
महर्षि व्यास के अनुसार, विश्व में मनुष्य से श्रेष्ठ और कुछ नहीं। उसी में परम चेतना को उभारने वाली विद्या का नाम अध्यात्म है। वस्तुत: अध्यात्म का लक्ष्य है- मनुष्य के अंदर छिपी शक्तियों और सत्प्रवृत्तियों को मनोवैज्ञानिक पद्धति से इतना आगे बढ़ाना कि व्यक्ति के जीवन में देवत्व छलकने... आगे पढ़े

गंगा जयंति: आज गंगा पूजन करना अमोघ फलदायक होता

Updated on 25 April, 2015, 13:45
वैसाख शुक्ल सप्तमी के पावन दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई। इस कारण इस पवित्र तिथि को गंगा जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 25 अप्रैल को मनाया जाएगा। गंगा जयंती के शुभ अवसर पर गंगा जी में स्नान करने से पुण्यलाभ प्राप्त होता है।... आगे पढ़े

शंकराचार्य जयंती: आधुनिकता के प्रणेता

Updated on 23 April, 2015, 13:37
आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत दर्शन द्वारा लोगों के बीच खाइयों को पाटने का प्रयास कर धर्म और दर्शन में आधुनिकता की नींव रखी। उनकी जयंती (23 अप्रैल) पर विशेष... आठवीं शताब्दी की शुरुआत का लगभग दो दशक वैचारिक दृष्टि से भारत के लिए ऐसा क्रांतिकारी समय रहा, जो आज तक... आगे पढ़े

मधुर हो जीवन का हर क्षण

Updated on 22 April, 2015, 12:21
जिस प्रकार हमेशा प्रत्यंचा तनी रहने से धनुष बेकार हो जाता है, उसी प्रकार यदि हम हर वक्त तनाव में रहेंगे, तो हमारी रचनात्मकता क्षीण हो जाएगी। आइए, मन पर भारी सारे बोझ हटा लें और मधुर बना लें जीवन का हर क्षण...। एक बच्चे को अपना मनपसंद खिलौना मिल गया।... आगे पढ़े

परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार कहे जाते

Updated on 21 April, 2015, 12:53
परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार कहे जाते हैं। वह त्रेता युग (रामायण काल) के मुनि थे। उनका जन्म भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि की ओर से करवाए गए पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप हुआ। पौराणिक उल्लेख- परशुरामजी का उल्लेख रामायण, महाभारत, भागवत पुराण और कल्कि पुराण इत्यादि अनेक... आगे पढ़े

भगवान है क्या ?

Updated on 20 April, 2015, 13:28
प्रश्न- भगवान हैं क्या? गुरुरविशंकरजी- क्यों नहीं? अगर भगवान ना होते तो तुम यह प्रश्न ही क्यों पूछोगे? तुम क्या कहोगे अगर एक लहर सागर के अस्तित्व पर सवाल करे? सागर है तभी तो लहर है। जिसके कारण तुम खड़े हो, तुम्हारा अस्तित्व है, तुम सोचते हो, समझते हो, सांस लेते... आगे पढ़े

गुरु का प्रयोजन

Updated on 19 April, 2015, 9:13
गुरु शब्द का अर्थ बड़ा प्यारा है. इसका अर्थ होता है- जिससे अंधकार मिटे. गुरु शब्द का अर्थ होता है- दीया, रोशनी. प्यारा शब्द है. मगर प्यारे से प्यारे शब्द गलत लोगों के हाथों में पड़ कर घातक हो जाते हैं. कितना प्यारा शब्द है! लेकिन उसके क्या-क्या अर्थ हो गए!... आगे पढ़े

रूप का रहस्य, रहस्य का रूप

Updated on 17 April, 2015, 13:27
देहरादून । हिमालयी महाकुंभ श्री नंदा देवी राजजात का अद्भुत, अलौकिक, अतुलनीय, अति प्राचीन, अविस्मरणीय और अति दुर्लभ पड़ाव है रूपकुंड। चमोली जनपद के सीमांत देवाल विकासखंड में समुद्रतल से 4778 मीटर की ऊंचाई पर नंदाकोट, नंदाघाट और त्रिशूल जैसे विशाल हिमशिखरों की छांव में चट्टानों और पत्थरों के विस्तार... आगे पढ़े

कन्फ्यूशियस का जवाब

Updated on 16 April, 2015, 13:17
कन्फ्यूशियस के समय चीन बड़े उतार-चढ़ाव से गुजर रहा था। सभी के मन में अराजकता और रक्तपात का भय समाने लगा। सरकार का एक नुमाइंदा ऐसे माहौल में कन्फ्यूशियस को ढूंढ़ने लगा। उसने कन्फ्यूशियस को एक पेड़ के नीचे ध्यानमग्न देखा। उसने कहा, 'इस विकट समय में आपका मार्गदर्शन चाहिए।... आगे पढ़े

बैसाखी पर पड़ी थी खालसा की नींव

Updated on 14 April, 2015, 12:02
बैसाखी प्रसन्नता का पर्व है। नई फसल से घर में समृद्धि की खुशी होती है, तो इसमें शामिल है खालसा पंथ की स्थापना का स्मरण भी...। बैसाखी (14 अप्रैल) पर विशेष... साखी पंजाब का खास सामाजिक पर्व है, जिसे लोग मिल-जुलकर आनंदपूर्वक मनाते हैं। नई फसल के घर आने की खुशी... आगे पढ़े

अध्यात्म का मूल

Updated on 13 April, 2015, 10:25
सभी धर्म जीवन के सत्य की ही खोज करते हैं। हमें पूजा-पाठ और कर्मकांड में उलझने के बजाय उनका मर्म समझना चाहिए... एकम् सत्य द्वितीय ना अस्ति। सत्य एक और सनातन है। गुरुबाणी में इसे आदि सच, जुगादि सच इत्यादि शब्दों से संजोया गया है। बाइबल में 'मैं सत्य हूं के... आगे पढ़े

प्रथा और परिवर्तन

Updated on 9 April, 2015, 11:47
एक ऐसा इलाका था, जहां की भूमि उर्वर नहीं थी। वहां बहुत कम फल उपजते थे। ईश्वर ने एक नियम बनाया कि वहां के लोग दिन में केवल एक ही फल खाएं। इस नियम को लोगों तक पहुंचाया ईश्वर के दूत ने। लोगों ने दूत की बात मानी और दिन... आगे पढ़े

भाग्य की पुस्तक

Updated on 8 April, 2015, 14:09
एक व्यक्ति का आखिरी समय नजदीक आ गया था। जब वह रेगिस्तानी रास्ते पर जा रहा था, उस समय उसके पास यमदूत आया। यमदूत को वह व्यक्ति पहचान नहीं सका। लेकिन चूंकि वह अच्छा आदमी था, इसलिए उसने यमदूत को पानी पिलाया। इसके बाद उस व्यक्ति ने पूछा, 'तुम कौन... आगे पढ़े

जीवन-मंत्र है गीता ज्ञान

Updated on 7 April, 2015, 13:01
श्रीकृष्ण कहते हैं, जो पुरुष कर्मफल का आश्रय न लेकर करने योग्य कर्म करता है, वह संन्यासी तथा योगी है। केवल अग्नि का त्याग करने वाला संन्यासी नहीं है तथा केवल क्रियाओं का त्याग करने वाला योगी नहीं है। भावार्थ : यहां कृष्ण निष्काम कर्म करने वाले को संन्यासी व योगी... आगे पढ़े

पास्का-जागरण की चरम सीमा पवित्र मिस्सा

Updated on 6 April, 2015, 8:06
प्रभु यीशू के पुनरुत्‍थान का दिन पास्‍का पर्व यानि ईस्‍टर ईसाई समुदाय ऐतिहासिक घटना के रूप में हर्षोल्‍लास से मनाता है। पास्‍का जागरण चार भागों में संपन्‍न होता है। पहला भाग यानी प्रकाश की धर्म-विधि पहला भाग आग या प्रकाश पर केंद्रित है जो यीशू ख्रीस्‍त का प्रतीक है, जिन्होंने अपने... आगे पढ़े

संत अपने लिए नहीं जीता

Updated on 4 April, 2015, 12:51
संतों को ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। वह अपनी साधना से प्रकृति में फैली ऊर्जा का संग्रह करता है। अपनी इस संग्रहित ऊर्जा से अपने भक्तों का कल्याण करता है। इसलिए संतों के संपर्क में रहने वाला व्यक्ति स्वस्थ और शांत रहता है। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि दुष्ट... आगे पढ़े

अपने जीवन का लक्ष्य

Updated on 4 April, 2015, 9:19
समुद्र में मिलने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने वाली गंगा रास्ते में अवरोध उत्पन्न करने वाली बाधाओं की परवाह नहीं करती। यदि आपने अपने जीवन का लक्ष्य कुछ विशेष तय किया है, तो गंगा से सीख लें... प्रसिद्ध कवि एवं उपन्यासकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय युवावस्था में क्रांतिकारी आंदोलनों में... आगे पढ़े

प्रभु यीशू के दुःखभोग का दिन है गुड फ्राइडे

Updated on 3 April, 2015, 9:01
 फादर सायमन मोहता पवित्र शुक्रवार यानि गुड फ्राइडे मानव मुक्ति का दिन है। यह दिन हमें प्रभु यीशू के दुःखभोग तथा उनके क्रूस पर मरण की ऐतिहासिक घटना को याद दिलाता हैं। इस दिन को सारा ईसाई सामुदाय प्रभु यीशू की इस महान त्याग एवं समर्पण की घटना को याद करता... आगे पढ़े

जानिए भगवान महावीर के अमृत वचन

Updated on 2 April, 2015, 9:02
भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओतप्रोत था। उन्होंने दुनिया को सत्य, अहिंसा का पाठ पढ़ाया, पूरी दुनिया को उपदेश दिए।     यदि संसार के दु:खों, रोगों, जन्म-मृत्यु, भूख-प्यास आदि से बचना चाहते हों तो अपनी आत्मा को पहचान लो।     दूसरों के साथ... आगे पढ़े

भलाई का भाव होता है यज्ञ

Updated on 2 April, 2015, 8:42
अर्थात: हे कुरुश्रेष्ठ अर्जुन! यज्ञ से बचे हुए अमृत का सेवन करने वाले सनातन ब्रह्म को प्राप्त होते हैं। लेकिन जो यज्ञ नहीं करता उसके लिए यह मनुष्यलोक ही सुखद नहीं है, फिर परलोक की तो बात ही क्या? एक भाव होता है 'मेरा' दूसरा है 'मेरे लिए' और तीसरा है... आगे पढ़े

गीता ज्ञान

Updated on 1 April, 2015, 13:32
विषयों (वस्तुओं) के बारे में सोचते रहने से मनुष्य को उनसे लगाव हो जाता है। इससे उनमें इच्छा पैदा होती है और इच्छाओं से क्रोध का जन्म होता है। भावार्थ : हमारे भीतर क्रोध तभी पैदा होता है, जब हमारी इच्छा के विरुद्ध परिणाम आता है। इच्छाओं को हम स्वयं भी... आगे पढ़े

हतोत्साहित मन पराजय की पहली सीढ़ी

Updated on 1 April, 2015, 8:08
महाभारत का युद्ध चल रहा था। एक ओर अर्जुन थे, जिनके सारथी थे 'श्री कृष्ण'। तो दूसरी ओर कर्ण थे और उनका सारथी 'शल्य'। भगवान श्री कृष्ण ने कर्ण के सारथी से कहा- 'तुम हमारे विरुद्ध जरूर लड़ना पर मेरी एक बात जरूर मानना।' जब कर्ण प्रहार करे तब कहना कि,... आगे पढ़े

मुझे हर रोगी में दिखाई देते हैं प्रभु यीशू

Updated on 31 March, 2015, 7:49
प्रख्यात समाज सेविका और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मदर टेरेसा से एक बार पत्रकार खुशवंत सिंह ने सवाल किया, 'मदर', मुझे बताइए कि कोढ़ और गैंग्रीन जैसे घिनौने रोग वाले रोगियों को छूने का अभ्यास आपने कैसे किया ? पत्रकार की आंखों में झांकते हुए मदर ने निर्विकार भाव से... आगे पढ़े

गंगा से सीख: अपना लक्ष्य हासिल करें

Updated on 27 March, 2015, 12:16
समुद्र में मिलने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने वाली गंगा रास्ते में अवरोध उत्पन्न करने वाली बाधाओं की परवाह नहीं करती। यदि आपने अपने जीवन का लक्ष्य कुछ विशेष तय किया है, तो गंगा से सीख लें.. सिद्ध कवि एवं उपन्यासकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय युवावस्था में क्रांतिकारी आंदोलनों में... आगे पढ़े

जीवन का रहस्य

Updated on 25 March, 2015, 12:52
धर्म का पहला संबंध जीवन के रहस्य के अनुभव से है- वह जो जीवन की मिस्ट्री है. और समग्र जीवन ही रहस्यपूर्ण है- एक छोटे से पत्थर से लेकर आकाख़् के सूरज तक, एक छोटे बीज से लेकर आकाख़् को छूते वृक्षों तक- सभी कुछ, जो भी है, अत्यंत रहस्यपूर्ण... आगे पढ़े

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